यूक्रेन का बड़ा ड्रोन ऑपरेशन: रूस की ‘शैडो फ्लीट’ के 8 टैंकरों पर हमले का दावा, सप्लाई चेन पर असर की संभावना
रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यूक्रेन ने दावा किया है कि उसने आज़ोव सागर में रूस की तथाकथित ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े आठ तेल टैंकरों को ड्रोन हमले में निशाना बनाया है। यूक्रेन का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य रूसी सेना की ईंधन आपूर्ति और सैन्य लॉजिस्टिक्स को बाधित करना था। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है और रूस की ओर से इस पर आधिकारिक प्रतिक्रिया भी सामने नहीं आई है।
आज़ोव सागर में ड्रोन हमले का यूक्रेन का दावा
यूक्रेन ने रूस के खिलाफ समुद्री मोर्चे पर एक बड़ी कार्रवाई का दावा किया है। यूक्रेनी ड्रोन फोर्स के अनुसार, आज़ोव सागर (Sea of Azov) में रूस की ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े आठ तेल टैंकरों को ड्रोन हमलों में निशाना बनाया गया। यूक्रेन का कहना है कि ये टैंकर रूसी सेना के लिए ईंधन और अन्य आवश्यक सामग्री की आपूर्ति कर रहे थे। हमले के बाद कई जहाजों में आग लगने और समुद्र में धुआं उठने का दावा किया गया है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
रूस की सप्लाई लाइन को कमजोर करना लक्ष्य
यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक, यह अभियान रूस की सैन्य रसद (लॉजिस्टिक्स) को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा है। उनका कहना है कि इन टैंकरों के जरिए क्रीमिया में तैनात रूसी सैनिकों तक ईंधन और सैन्य सामग्री पहुंचाई जाती थी। यूक्रेन का दावा है कि लगातार हो रहे हमलों से क्रीमिया में रूस की आपूर्ति व्यवस्था पर दबाव बढ़ा है और सैन्य गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं। इससे पहले भी यूक्रेन इसी क्षेत्र में दो अन्य जहाजों को निशाना बनाने का दावा कर चुका है।
क्रीमिया में ईंधन आपूर्ति पर बढ़ा दबाव
यूक्रेन का कहना है कि पिछले कुछ सप्ताह से वह क्रीमिया में रूस के ऊर्जा ढांचे और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को लगातार निशाना बना रहा है। यूक्रेनी पक्ष के अनुसार, इन अभियानों के कारण ईंधन की उपलब्धता प्रभावित हुई है। हालांकि, स्थानीय हालात और कथित आपूर्ति संकट संबंधी दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। क्रीमिया रूस के लिए रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण क्षेत्र माना जाता है और वर्ष 2014 में इसके अधिग्रहण के बाद से यह रूसी सैन्य अभियानों का प्रमुख केंद्र बना हुआ है।
‘शैडो फ्लीट’ क्या है और क्यों है चर्चा में?
‘शैडो फ्लीट’ उन पुराने तेल टैंकरों के समूह को कहा जाता है, जिनका उपयोग रूस पर लगाए गए अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद तेल परिवहन के लिए किए जाने के आरोप लगते रहे हैं। कई पश्चिमी देशों का दावा है कि इन जहाजों के जरिए प्रतिबंधों से बचकर रूसी तेल का निर्यात किया जाता है। यूक्रेन लंबे समय से अपने सहयोगी देशों से इन जहाजों पर सख्त कार्रवाई और अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की मांग करता रहा है। रूस ने इन आरोपों को पहले भी खारिज किया है।
वीडियो जारी, लेकिन स्वतंत्र पुष्टि का इंतजार
यूक्रेन ने हमले से जुड़ा ड्रोन फुटेज भी जारी किया है, जिसमें समुद्र में जहाजों पर हमले और आग जैसी तस्वीरें दिखाई देने का दावा किया गया है। हालांकि, इन वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वहीं, रूस की ओर से भी इस कथित हमले और उससे हुए नुकसान को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। ऐसे में घटनाक्रम से जुड़ी कई जानकारियों की पुष्टि अभी बाकी है।