RERA के नए नियम लागू: अब बिल्डर को हर रुपये और हर ईंट का देना होगा हिसाब, घर खरीदारों को मिलेगा बड़ा फायदा
राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने घर और फ्लैट खरीदने वालों के हितों को मजबूत करने के लिए तिमाही प्रगति रिपोर्ट (QPR) के नियमों को और सख्त कर दिया है। अब बिल्डरों को केवल निर्माण की प्रगति ही नहीं, बल्कि खरीदारों से मिली रकम, उसके उपयोग, प्रोजेक्ट की वित्तीय स्थिति और निर्माण स्थल की जियो-टैग्ड तस्वीरों तक का पूरा ब्यौरा देना होगा। नए नियमों से रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ने और खरीदारों के हितों की बेहतर सुरक्षा की उम्मीद है।
रेरा ने सख्त किए तिमाही रिपोर्टिंग के नियम
राजस्थान रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी (रेरा) ने रियल एस्टेट परियोजनाओं की निगरानी को और प्रभावी बनाने के लिए तिमाही प्रगति रिपोर्ट (Quarterly Progress Report-QPR) के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब बिल्डरों को हर तीन महीने में परियोजना की निर्माण प्रगति के साथ-साथ वित्तीय स्थिति की भी विस्तृत जानकारी देनी होगी। इसमें खरीदारों से प्राप्त धनराशि, फंड का स्रोत, रेरा रिटेंशन बैंक खाते में जमा राशि, निकासी और शेष राशि का पूरा विवरण निर्धारित प्रारूप में उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा। इस कदम का उद्देश्य परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाना और खरीदारों के हितों की रक्षा करना है।
निर्माण की हर प्रगति पर रहेगी रेरा की नजर
नए नियमों के तहत बिल्डरों को परियोजना स्थल की जियो-टैग्ड तस्वीरें हर तिमाही रेरा पोर्टल पर अपलोड करनी होंगी। इन तस्वीरों के माध्यम से यह स्पष्ट होगा कि पिछले तीन महीनों में निर्माण कार्य कितना आगे बढ़ा है। इसके अलावा सड़क, पार्क, क्लब हाउस, सीवरेज, बिजली, पानी और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास की वर्तमान स्थिति और उन्हें पूरा करने की समय-सीमा भी बतानी होगी। यह जानकारी रेरा की वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध रहेगी, जिससे खरीदार आसानी से अपने प्रोजेक्ट की वास्तविक स्थिति जान सकेंगे।
खरीदारों से मिले पैसे का पूरा हिसाब देना होगा
रेरा ने स्पष्ट किया है कि अब बिल्डरों को यह भी बताना होगा कि परियोजना के खरीदारों से अब तक कितनी राशि प्राप्त हुई है। प्रत्येक फ्लैट, प्लॉट या कॉमर्शियल यूनिट का बिक्री मूल्य, खरीदार से प्राप्त भुगतान और एग्रीमेंट फॉर सेल (Agreement for Sale) की तारीख का रिकॉर्ड भी देना होगा। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि खरीदारों का पैसा नियमानुसार उसी परियोजना के निर्माण में खर्च हो रहा है या नहीं। हालांकि, परियोजना में निवेश के स्रोत से जुड़ी कुछ वित्तीय जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाएगी और वह केवल रेरा के रिकॉर्ड तक सीमित रहेगी।
लोन के ब्याज और मूलधन पर भी नियम हुए स्पष्ट
रेरा ने विकास लागत को लेकर भी स्थिति स्पष्ट कर दी है। नए निर्देशों के अनुसार, किसी परियोजना की डेवलपमेंट कॉस्ट में केवल बैंक, वित्तीय संस्थानों, एनबीएफसी या अन्य एजेंसियों से लिए गए ऋण पर देय ब्याज को ही शामिल माना जाएगा। वहीं, ऋण की मूल राशि (प्रिंसिपल) की अदायगी को विकास लागत का हिस्सा नहीं माना जाएगा, क्योंकि इसे निर्माण पर किया गया वास्तविक खर्च नहीं माना जाता। इस व्यवस्था से परियोजना की लागत का अधिक पारदर्शी और वास्तविक आकलन संभव होगा।
घर और फ्लैट खरीदने वालों को क्या मिलेगा फायदा?
रेरा के नए नियमों का सबसे बड़ा लाभ घर, फ्लैट और कॉमर्शियल प्रॉपर्टी खरीदने वाले लोगों को मिलेगा। खरीदार अब परियोजना की वास्तविक प्रगति, वित्तीय स्थिति और वादा की गई सुविधाओं के विकास की नियमित जानकारी प्राप्त कर सकेंगे। यदि निर्माण कार्य में देरी होती है या खरीदारों के पैसे का दुरुपयोग होता है, तो इसकी जानकारी समय रहते सामने आ जाएगी। इससे खरीदार समय पर रेरा के समक्ष शिकायत दर्ज करा सकेंगे और कानूनी कार्रवाई भी आसान होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता बढ़ेगी, निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा और समय पर परियोजनाएं पूरी होने की संभावना भी बढ़ेगी।