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पुणे फायरिंग केस: बिश्नोई गैंग के 4 आरोपी गिरफ्तार, पांच राज्यों में चला ऑपरेशन; पुलिस ने नेटवर्क ध्वस्त करने का किया दावा

पुणे में कारोबारी से रंगदारी मांगने और फायरिंग करने के मामले में पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पांच राज्यों में करीब दो सप्ताह तक चले अभियान के बाद पुलिस ने दावा किया है कि शहर में गैंग के सक्रिय नेटवर्क को फिलहाल ध्वस्त कर दिया गया है। जांच के दौरान रेकी, सूचना उपलब्ध कराने और फायरिंग में शामिल आरोपियों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस अब इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में जुटी है।

रंगदारी और फायरिंग मामले में पुलिस को मिली बड़ी सफलता

पुणे में कारोबारी को धमकी देकर करोड़ों रुपये की रंगदारी मांगने और इनकार के बाद फायरिंग करने के मामले में पुलिस ने अहम सफलता हासिल की है। क्राइम ब्रांच ने पांच राज्यों में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच के अनुसार, इनमें फायरिंग करने वाले, घटना से पहले रेकी करने वाले और कारोबारियों की जानकारी गैंग तक पहुंचाने वाले लोग शामिल हैं। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच में आरोपियों के तार लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े मिले हैं। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अब पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है।

कारोबारी से मांगी गई थी 5 करोड़ रुपये की रंगदारी

जांच के मुताबिक, मामले की शुरुआत जून महीने की शुरुआत में हुई, जब एक स्टील कारोबारी को फोन कर खुद को बिश्नोई गैंग का सदस्य बताने वाले व्यक्ति ने पांच करोड़ रुपये की रंगदारी की मांग की। कारोबारी द्वारा रकम देने से इनकार करने के बाद मंतरवाड़ी स्थित उनके गोदाम को निशाना बनाया गया। बदमाशों ने वहां कई राउंड फायरिंग की, जिससे इलाके में दहशत फैल गई। घटना के बाद सोशल मीडिया पर गैंग के नाम से एक पोस्ट भी वायरल हुआ, जिसमें हमले की जिम्मेदारी लेने और आगे भी कार्रवाई की धमकी देने का दावा किया गया।

15 दिन तक पांच राज्यों में चली सघन कार्रवाई

घटना के बाद पुणे पुलिस की क्राइम ब्रांच ने विशेष जांच दल का गठन कर लगातार कार्रवाई शुरू की। पिछले 15 दिनों के दौरान पुलिस टीमों ने राजस्थान, हरियाणा, उत्तराखंड समेत पांच राज्यों में छापेमारी की। इस अभियान के दौरान राजस्थान के हनुमानगढ़ से एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया, जिस पर गैंग को स्थानीय स्तर पर कारोबारियों की जानकारी उपलब्ध कराने का आरोप है। वहीं उत्तराखंड के हरिद्वार से तीन अन्य संदिग्धों को पकड़ा गया, जिन पर पुणे के रावेत इलाके में एक अन्य फायरिंग की घटना में शामिल होने का भी आरोप है।

पूछताछ में नेटवर्क और हथियारों से जुड़े सुराग मिले

पुलिस अधिकारियों के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में गैंग के काम करने के तरीके, स्थानीय संपर्कों और हथियारों की उपलब्धता से जुड़े कई अहम सुराग मिले हैं। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि महाराष्ट्र में गैंग का नेटवर्क कितना व्यापक है और किन-किन लोगों की इसमें भूमिका रही है। पुलिस का मानना है कि स्थानीय लोगों की मदद से रेकी कराकर कारोबारियों को निशाना बनाने की साजिश रची जा रही थी। इसी आधार पर आगे और गिरफ्तारियां होने की संभावना भी जताई जा रही है।

पुलिस कमिश्नर बोले- कारोबारियों को घबराने की जरूरत नहीं

पुणे पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने कहा कि इस कार्रवाई के बाद शहर में गैंग की गतिविधियों को प्रभावी ढंग से निष्क्रिय कर दिया गया है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कारोबारियों और आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है तथा संगठित अपराध के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। पुलिस ने स्पष्ट किया कि अपराधियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा और जो भी व्यक्ति इस नेटवर्क से जुड़ा पाया जाएगा, उसके खिलाफ कानून के तहत सख्त कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने लोगों से भी अपील की है कि किसी भी तरह की धमकी मिलने पर तुरंत पुलिस को सूचना दें।

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