Packaged Food Side Effects: पैकेटबंद पनीर और हेल्दी फूड के दावों का सच, जानिए सेहत पर कितना पड़ता है असर
बाजार में बिकने वाले पैकेटबंद खाद्य उत्पादों पर लिखे “100% नेचुरल”, “हेल्दी” और “फ्रेश” जैसे दावे हमेशा वास्तविकता को नहीं दर्शाते। इसी वजह से भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने कई कंपनियों से ऐसे दावों पर जवाब मांगा है। विशेषज्ञों के अनुसार, कुछ पैकेज्ड फूड्स में प्रिजर्वेटिव्स, अतिरिक्त चीनी, रिफाइंड फैट और अन्य एडिटिव्स का इस्तेमाल स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर डाल सकता है। इसलिए किसी भी उत्पाद को खरीदने से पहले उसके लेबल और सामग्री की जानकारी पढ़ना बेहद जरूरी है।
FSSAI क्यों हुआ सख्त?
भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने हाल के दिनों में कई खाद्य कंपनियों द्वारा किए जा रहे भ्रामक स्वास्थ्य दावों पर सख्ती दिखाई है। “इम्युनिटी बूस्टर”, “100% नेचुरल”, “हेल्दी चॉइस” या “फ्रेश” जैसे दावों के पीछे वैज्ञानिक प्रमाण और लेबलिंग नियमों की जांच की जा रही है। उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि उपभोक्ताओं को उत्पाद के बारे में सही और पारदर्शी जानकारी मिले। विशेषज्ञों का मानना है कि आकर्षक दावों के आधार पर नहीं, बल्कि उत्पाद की सामग्री और पोषण संबंधी जानकारी देखकर ही खरीदारी करनी चाहिए।
पनीर में किस तरह की मिलावट की आशंका रहती है?
विभिन्न शोधों के अनुसार, बाजार में मिलने वाले कुछ पनीर में गुणवत्ता से समझौता किए जाने के मामले सामने आते रहे हैं। कुछ मामलों में लागत कम करने के लिए अलग स्रोत का दूध, स्टार्च या अन्य सस्ते डेयरी घटकों का उपयोग किया जाता है। वहीं, कुछ उत्पादों में दूध की वसा के स्थान पर वनस्पति तेल का इस्तेमाल किए जाने की भी रिपोर्टें सामने आई हैं। हालांकि, यह सभी उत्पादों पर लागू नहीं होता, लेकिन उपभोक्ताओं को विश्वसनीय ब्रांड और प्रमाणित विक्रेताओं से ही डेयरी उत्पाद खरीदने की सलाह दी जाती है।
पैकेज्ड फूड में कौन-कौन से एडिटिव्स इस्तेमाल होते हैं?
लंबे समय तक उत्पाद को सुरक्षित रखने के लिए कई पैकेज्ड फूड्स में सोडियम बेंजोएट, सॉर्बिक एसिड जैसे प्रिजर्वेटिव्स का इस्तेमाल किया जाता है। वहीं स्वाद और बनावट बेहतर बनाने के लिए अतिरिक्त चीनी, ग्लूकोज सिरप, पाम ऑयल या हाइड्रोजनेटेड फैट भी मिलाए जा सकते हैं। यह सभी तत्व नियामक मानकों के भीतर निर्धारित मात्रा में उपयोग किए जा सकते हैं, लेकिन इनका अत्यधिक सेवन स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए नियमित रूप से प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन करने से बचना बेहतर माना जाता है।
लगातार सेवन से बढ़ सकते हैं ये स्वास्थ्य जोखिम
विशेषज्ञों के अनुसार, अधिक मात्रा में प्रोसेस्ड और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड खाने से मोटापा, फैटी लिवर, उच्च कोलेस्ट्रॉल और हृदय रोगों का खतरा बढ़ सकता है। इनमें मौजूद अतिरिक्त चीनी और अस्वस्थ वसा शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ाते हैं, जिससे वजन तेजी से बढ़ सकता है। इसके अलावा, लंबे समय तक अधिक शुगर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप-2 डायबिटीज के जोखिम को भी बढ़ा सकता है। संतुलित आहार और नियमित शारीरिक गतिविधि इन जोखिमों को कम करने में मदद करती है।
पाचन और एलर्जी पर भी पड़ सकता है असर
कुछ लोगों में प्रिजर्वेटिव्स, कृत्रिम रंग और फ्लेवर वाले खाद्य पदार्थों से गैस, एसिडिटी, पेट फूलना या पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। वहीं संवेदनशील व्यक्तियों में त्वचा पर एलर्जी, सांस लेने में दिक्कत या अन्य एलर्जिक प्रतिक्रियाएं भी देखने को मिल सकती हैं। बच्चों में अत्यधिक प्रोसेस्ड फूड के सेवन को लेकर भी विशेषज्ञ संयम बरतने की सलाह देते हैं। हालांकि, किसी भी स्वास्थ्य समस्या का कारण केवल एक खाद्य पदार्थ नहीं होता, बल्कि संपूर्ण खानपान और जीवनशैली भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
खरीदते समय किन बातों का रखें ध्यान?
पैकेज्ड फूड खरीदते समय केवल सामने लिखे आकर्षक दावों पर भरोसा न करें। हमेशा उत्पाद का इंग्रीडिएंट्स लिस्ट, न्यूट्रिशन फैक्ट्स, निर्माण और एक्सपायरी डेट तथा FSSAI लाइसेंस की जानकारी जरूर देखें। यदि किसी उत्पाद में अतिरिक्त चीनी, ट्रांस फैट या अत्यधिक प्रिजर्वेटिव्स हों तो उसका सेवन सीमित मात्रा में करें। ताजा और कम प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों को अपनी डाइट का हिस्सा बनाना लंबे समय में स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी माना जाता है।