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Arunachal Border News: अरुणाचल में चीनी घुसपैठ का दावा कितना सच? वायरल वीडियो की सामने आई पूरी सच्चाई

अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के 60 किलोमीटर अंदर तक घुसने के दावों ने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी है। हालांकि, भारतीय सेना ने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया है। वहीं, पूर्व रॉ अधिकारी लकी बिष्ट ने वायरल वीडियो की सच्चाई सामने रखते हुए कहा कि वीडियो में दिखाई दे रहे हथियारबंद लोग चीनी सैनिक नहीं, बल्कि मणिपुर के उग्रवादी संगठन यूएनएलएफ के सदस्य हैं। ऐसे में सोशल मीडिया पर फैल रहे दावों और वास्तविक स्थिति के बीच बड़ा अंतर सामने आया है।

सोशल मीडिया पर वायरल दावों से बढ़ी हलचल

हाल के दिनों में सोशल मीडिया पर कई वीडियो तेजी से वायरल हुए, जिनमें दावा किया गया कि चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) अरुणाचल प्रदेश में 60 किलोमीटर तक भारतीय सीमा के भीतर प्रवेश कर चुकी है। इन वीडियो के जरिए लोगों में चिंता और भ्रम फैलाने की कोशिश की गई। हालांकि, सुरक्षा मामलों के जानकारों का कहना है कि बिना आधिकारिक पुष्टि के ऐसे दावों पर भरोसा करना उचित नहीं है। सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़ी किसी भी जानकारी की पुष्टि केवल अधिकृत सरकारी एजेंसियों और सेना के आधिकारिक बयानों से ही की जानी चाहिए।

पूर्व रॉ अधिकारी ने बताया वायरल वीडियो का सच

भारत की विदेशी खुफिया एजेंसी रॉ में कार्य कर चुके पूर्व अधिकारी लकी बिष्ट ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर वायरल वीडियो को लेकर विस्तृत प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि वीडियो में दिखाई देने वाले लोग चीनी सैनिक नहीं हैं। उनके अनुसार, यह वीडियो नॉर्थ-ईस्ट में सक्रिय प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन यूनाइटेड नेशनल लिब्रेशन फ्रंट (UNLF) से जुड़े लोगों का है। उन्होंने लोगों से अपील की कि किसी भी वीडियो को बिना जांचे-परखे साझा न करें, क्योंकि इससे गलत सूचनाएं तेजी से फैलती हैं और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर भ्रम पैदा होता है।

अरुणाचल नहीं, मणिपुर का बताया गया वीडियो

लकी बिष्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि जिस वीडियो को अरुणाचल प्रदेश का बताकर प्रसारित किया जा रहा है, वह वास्तव में मणिपुर के फयांग क्षेत्र का है। उनके अनुसार यह वीडियो कुछ दिन पुराना है और इसे गलत संदर्भ में पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया पर पुराने वीडियो या तस्वीरों को नए घटनाक्रम से जोड़कर साझा करना आजकल आम बात हो गई है, जिससे लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बन जाती है। ऐसे मामलों में तथ्य जांचना बेहद जरूरी है।

भारतीय सेना ने घुसपैठ की खबरों को बताया निराधार

अरुणाचल प्रदेश में चीनी सेना के कथित अतिक्रमण को लेकर सामने आई खबरों पर भारतीय सेना ने भी आधिकारिक प्रतिक्रिया दी है। सेना ने कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्टों में यह दावा किया गया कि पीएलए ने भारतीय क्षेत्र में कैंप स्थापित कर लिए हैं, लेकिन उपलब्ध तथ्यों के आधार पर यह दावा पूरी तरह गलत और आधारहीन है। सेना ने स्पष्ट किया कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सतर्क है और किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।

स्थानीय संगठन के दावे से शुरू हुआ विवाद

विवाद की शुरुआत उस समय हुई जब अरुणाचल प्रदेश के एक स्थानीय आदिवासी संगठन ने आरोप लगाया कि उनकी पारंपरिक चरागाह और पुश्तैनी जमीन पर चीनी सेना का कब्जा हो गया है। संगठन का कहना था कि जिन इलाकों में पहले स्थानीय लोग अपने मवेशी चराते थे और वन उत्पाद एकत्र करते थे, वहां अब उनकी पहुंच नहीं रही। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई और भारतीय सेना ने भी ऐसे किसी अतिक्रमण से साफ इनकार कर दिया।

मणिपुर में शांति की अपील कर रहे पूर्व उग्रवादी नेता

इसी बीच मणिपुर से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। यूएनएलएफ के पूर्व चेयरमैन राज कुमार मेघेन उर्फ साना यायिमा, जो वर्षों तक उग्रवादी गतिविधियों का नेतृत्व कर चुके हैं, अब राज्य में जातीय हिंसा समाप्त करने की अपील कर रहे हैं। 82 वर्षीय मेघेन ने विभिन्न समुदायों के बीच संवाद बढ़ाने की पहल की है। उनका कहना है कि वे मेतेई, नगा और कुकी समुदायों के बीच बातचीत का माहौल बनाना चाहते हैं ताकि लंबे समय से जारी तनाव और हिंसा का शांतिपूर्ण समाधान निकाला जा सके।

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