सहकारिता क्षेत्र को मिलेगा नया विस्तार, इंश्योरेंस कंपनी और यूटिलिटी एग्रीगेटर कोऑपरेटिव बनाने का अमित शाह का बड़ा ऐलान
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने सहकारिता क्षेत्र को नई दिशा देने के लिए कई महत्वपूर्ण घोषणाएं की हैं। सरकार जल्द ही एक कोऑपरेटिव लाइफ इंश्योरेंस कंपनी स्थापित करने की तैयारी में है। साथ ही, भारत टैक्सी की तर्ज पर यूटिलिटी एग्रीगेटर कोऑपरेटिव विकसित कर सहकारी मॉडल के जरिए लोगों तक विभिन्न सेवाएं पहुंचाने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने की योजना बनाई गई है।
सहकारिता क्षेत्र के विस्तार की नई रणनीति
केंद्रीय सहकारिता मंत्री अमित शाह ने कहा कि सरकार सहकारिता क्षेत्र को केवल कृषि और डेयरी तक सीमित नहीं रखना चाहती, बल्कि इसे वित्तीय सेवाओं, बीमा और डिजिटल सुविधाओं तक भी विस्तारित किया जाएगा। इसी दिशा में एक नई कोऑपरेटिव लाइफ इंश्योरेंस कंपनी स्थापित करने की तैयारी चल रही है। सरकार का उद्देश्य सहकारी संस्थाओं के माध्यम से आम लोगों को सस्ती और भरोसेमंद सेवाएं उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही सहकारिता मॉडल को देश की अर्थव्यवस्था का मजबूत आधार बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
भारत टैक्सी मॉडल पर बनेगा यूटिलिटी एग्रीगेटर कोऑपरेटिव
अमित शाह ने घोषणा की कि भारत टैक्सी की तर्ज पर जल्द ही यूटिलिटी एग्रीगेटर कोऑपरेटिव विकसित किया जाएगा। यह ऐसा साझा डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा, जहां नागरिकों को एक ही स्थान पर कई तरह की आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। सरकार का मानना है कि सहकारी मॉडल के माध्यम से इस प्लेटफॉर्म का लाभ सीधे आम लोगों तक पहुंचेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। आने वाले समय में इसे सहकारिता क्षेत्र की बड़ी पहल के रूप में देखा जा रहा है।
श्वेत क्रांति-2 से डेयरी नेटवर्क होगा और मजबूत
अमित शाह ने श्वेत क्रांति-2 का उल्लेख करते हुए कहा कि सरकार देशभर में सहकारी डेयरी नेटवर्क का विस्तार करना चाहती है। उन्होंने सभी राज्य डेयरी फेडरेशनों से अगले दो वर्षों में दूध उत्पादक किसानों की संख्या में कम से कम 35 प्रतिशत वृद्धि का लक्ष्य तय करने का आग्रह किया। इसके लिए अधिक गांवों में नई प्राथमिक कृषि सहकारी समितियां (PACS) और डेयरी समितियां गठित करने पर जोर दिया गया है। उद्देश्य यह है कि हर पात्र किसान को सहकारी डेयरी नेटवर्क से जोड़ा जा सके।
गन्ना किसानों और सहकारी उद्योग को भी मिलेगा लाभ
सरकार ने सहकारी चीनी उद्योग में भी कई सुधारों का उल्लेख किया। अमित शाह ने कहा कि चीनी, इथेनॉल, बगास, ऊर्जा, प्रेसमड, जैविक खाद और सल्फर जैसे उत्पादों के उत्पादन के लिए सहकारी समितियों के माध्यम से सफल मॉडल विकसित किया गया है। उन्होंने बताया कि गन्ना किसानों को अधिक मूल्य भुगतान पर कर राहत दी गई है और पुराने कर विवादों का समाधान भी किया गया है। इसके अलावा किसानों से जुड़े आयकर मामलों में भी महत्वपूर्ण राहत प्रदान की गई है।
सहकारिता आंदोलन को मिलेगा नया आर्थिक आधार
सरकार का लक्ष्य सहकारिता आंदोलन को देश की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण स्तंभ बनाना है। वर्तमान में देश में 8 लाख से अधिक सहकारी समितियां सक्रिय हैं, जिनसे करोड़ों लोग जुड़े हुए हैं। सरकार अब इन समितियों को बीमा, डिजिटल सेवाओं, परिवहन और अन्य उपयोगी क्षेत्रों से जोड़ने की रणनीति पर काम कर रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ये योजनाएं प्रभावी ढंग से लागू होती हैं तो ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलने के साथ-साथ रोजगार और वित्तीय समावेशन को भी बढ़ावा मिलेगा।