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श्रीलंका की नेगोम्बो जेल में खूनी संघर्ष, तीन अधिकारियों समेत 25 की मौत; हिंसा के बाद हाई अलर्ट

श्रीलंका के पश्चिमी तटीय शहर नेगोम्बो स्थित एक जेल में कैदियों के दो गुटों के बीच शुरू हुई हिंसक झड़प ने भयावह रूप ले लिया। दो दिनों तक चली हिंसा में तीन जेल अधिकारियों समेत 25 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई दर्जन लोग घायल हुए हैं। हालात पर काबू पाने के लिए विशेष सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है और सरकार ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। शुरुआती जांच में जेल के भीतर कथित मादक पदार्थों के नेटवर्क को लेकर विवाद को हिंसा की वजह माना जा रहा है।

दो दिनों तक भड़की हिंसा, 25 लोगों की गई जान

नेगोम्बो जेल में रविवार को कैदियों के दो विरोधी गुटों के बीच शुरू हुआ विवाद सोमवार तक गंभीर हिंसा में बदल गया। स्थिति तब और बिगड़ गई जब कुछ उपद्रवी कैदियों ने जेल के हथियारों पर कब्जा करने की कोशिश की। इस दौरान जेल परिसर में अफरा-तफरी मच गई और सुरक्षाकर्मियों को हालात नियंत्रित करने के लिए कड़ा कदम उठाना पड़ा। अस्पताल प्रशासन के अनुसार, इस हिंसा में कुल 25 लोगों की मौत हुई है, जिनमें तीन जेल अधिकारी भी शामिल हैं। यह हाल के वर्षों में श्रीलंका की जेलों में हुई सबसे गंभीर घटनाओं में से एक मानी जा रही है।

घायलों का अस्पतालों में इलाज, मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका

हिंसा में बड़ी संख्या में लोग घायल हुए हैं, जिनमें कैदी और सुरक्षा कर्मी दोनों शामिल हैं। घायलों को तुरंत नेगोम्बो और आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया, जहां कई की हालत गंभीर बताई जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि गंभीर रूप से घायल कुछ लोगों की स्थिति नाजुक बनी हुई है, इसलिए मृतकों की संख्या बढ़ने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता। अस्पताल प्रशासन लगातार घायलों का इलाज कर रहा है, जबकि प्रशासन पीड़ित परिवारों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में जुटा हुआ है।

मादक पदार्थों के नेटवर्क को लेकर विवाद बना हिंसा की वजह

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि जेल के भीतर सक्रिय कथित मादक पदार्थों की तस्करी से जुड़े नेटवर्क को लेकर दो गुटों के बीच लंबे समय से तनाव था। बताया जा रहा है कि एक गुट इस अवैध गतिविधि का समर्थन कर रहा था, जबकि दूसरा इसका विरोध कर रहा था। इसी विवाद ने पहले झड़प और फिर बड़े हिंसक संघर्ष का रूप ले लिया। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि जेल के भीतर अवैध गतिविधियां किस स्तर तक संचालित हो रही थीं और इसमें किन लोगों की भूमिका रही।

हालात संभालने के लिए एसटीएफ और दंगा नियंत्रण बल तैनात

हिंसा के बाद पूरे जेल परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई। स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) और दंगा नियंत्रण इकाइयों को मौके पर तैनात किया गया। प्रशासन ने संवेदनशील कैदियों को अन्य जेलों में स्थानांतरित करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है ताकि आगे किसी प्रकार की हिंसा दोबारा न भड़क सके। सुरक्षा एजेंसियां जेल परिसर की लगातार निगरानी कर रही हैं और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए अतिरिक्त बल को भी अलर्ट पर रखा गया है।

सरकार ने दिए उच्चस्तरीय जांच के आदेश

घटना के बाद श्रीलंका सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विशेष जांच दल का गठन किया है। जेल विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर आंतरिक जांच शुरू हो चुकी है, जबकि पुलिस भी समानांतर रूप से पूरे मामले की अलग जांच कर रही है। न्याय मंत्री ने घटना की विस्तृत रिपोर्ट तलब करते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा मजिस्ट्रेट स्तर पर भी जांच प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, ताकि हिंसा के वास्तविक कारणों और प्रशासनिक चूक की पूरी तस्वीर सामने आ सके।

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