तीन देशों के दौरे पर पीएम मोदी: जकार्ता से कूटनीतिक मिशन की शुरुआत, रक्षा-व्यापार और इंडो-पैसिफिक सहयोग पर रहेगा बड़ा फोकस
भारत की कूटनीतिक सक्रियता को नई दिशा देने वाले छह दिवसीय विदेश दौरे की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता से की है। इस दौरे में इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड के साथ रक्षा, व्यापार, डिजिटल सहयोग, निवेश, इंडो-पैसिफिक रणनीति और सांस्कृतिक रिश्तों को नई मजबूती देने पर विशेष जोर रहेगा। यह यात्रा भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक भूमिका को और सशक्त करने वाली मानी जा रही है।
जकार्ता में भव्य स्वागत, रिश्तों को नई ऊंचाई देने की तैयारी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने छह दिवसीय विदेश दौरे के पहले चरण में इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता पहुंचे, जहां उनका गर्मजोशी से स्वागत किया गया। एयरपोर्ट पर इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो के साथ विदेश मंत्री, पैलेस मंत्री, कैबिनेट सचिव और कई वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका अभिनंदन किया। यह यात्रा केवल औपचारिक मुलाकात तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक साझेदारी को नए स्तर तक ले जाने का अवसर भी है। प्रधानमंत्री का यह दौरा भारत की एक्ट ईस्ट नीति, महासागर (MAHASAGAR) विजन और मुक्त एवं समावेशी इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
भारत-इंडोनेशिया रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई गति
प्रधानमंत्री मोदी की यह इंडोनेशिया की चौथी यात्रा है और व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) बनने के बाद उनकी पहली द्विपक्षीय यात्रा भी है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, व्यापार, निवेश, खाद्य सुरक्षा, डिजिटल तकनीक और महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर व्यापक चर्चा होगी। हिंद महासागर क्षेत्र में साझा हितों को देखते हुए दोनों देश सुरक्षा और आर्थिक सहयोग को नई दिशा देने की तैयारी में हैं। इस यात्रा से क्षेत्रीय स्थिरता, आपसी विश्वास और दीर्घकालिक साझेदारी को और मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
रक्षा सहयोग और समुद्री सुरक्षा पर रहेगा विशेष जोर
भारत और इंडोनेशिया समुद्री पड़ोसी होने के कारण रक्षा और सुरक्षा सहयोग दोनों देशों के रिश्तों का महत्वपूर्ण आधार बन चुका है। इस दौरान संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा उद्योग में सहयोग, सैन्य प्रशिक्षण और समुद्री सुरक्षा जैसे विषय प्रमुख एजेंडे में शामिल रहेंगे। भारत इंडोनेशियाई सैन्य अधिकारियों और कैडेटों के प्रशिक्षण के अवसर बढ़ाने पर भी सहमति बना सकता है। इसके अलावा क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और रक्षा तकनीक में सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा होने की संभावना है, जिससे दोनों देशों के रणनीतिक संबंध और मजबूत होंगे।
व्यापार, निवेश और डिजिटल कनेक्टिविटी को मिलेगा बढ़ावा
आर्थिक मोर्चे पर भी यह यात्रा काफी अहम मानी जा रही है। इंडोनेशिया आज आसियान क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है और दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 24.78 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंच चुका है। इंडोनेशिया में 130 से अधिक भारतीय कंपनियां विभिन्न क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं। दोनों देश डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को भी मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं। भारत के यूपीआई और इंडोनेशिया की QRIS भुगतान प्रणाली को जोड़ने की पहल से पर्यटन, व्यापार और सीमा पार भुगतान पहले से अधिक आसान होने की उम्मीद है।
सांस्कृतिक विरासत से भी जुड़ेगा कूटनीतिक संदेश
प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के दौरान राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ योग्याकार्ता स्थित विश्व प्रसिद्ध प्रांबानन मंदिर का भी दौरा करेंगे। भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर भारत और इंडोनेशिया के साझा सांस्कृतिक संबंधों का प्रतीक माना जाता है। दोनों देश 2027 में रवीन्द्रनाथ टैगोर की ऐतिहासिक इंडोनेशिया यात्रा की शताब्दी भी संयुक्त रूप से मनाने की तैयारी कर रहे हैं। सांस्कृतिक कूटनीति के माध्यम से दोनों देश ऐतिहासिक संबंधों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और पर्यटन व सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देने की दिशा में भी काम करेंगे।
ऑस्ट्रेलिया में रक्षा, तकनीक और निवेश होंगे एजेंडे के केंद्र में
इंडोनेशिया के बाद प्रधानमंत्री मोदी ऑस्ट्रेलिया के मेलबर्न पहुंचेंगे, जहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज़ से होगी। दोनों देशों के बीच रक्षा, सुरक्षा, निवेश, शिक्षा, महत्वपूर्ण खनिज, उभरती तकनीकों, सप्लाई चेन और खेल विज्ञान में सहयोग बढ़ाने पर विस्तार से चर्चा होगी। प्रधानमंत्री भारत-ऑस्ट्रेलिया सीईओ फोरम को भी संबोधित करेंगे, जहां दोनों देशों के उद्योग जगत के प्रतिनिधि आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने पर विचार करेंगे। यह यात्रा भारत-ऑस्ट्रेलिया संबंधों को और मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
चार दशक बाद न्यूजीलैंड पहुंचेगा भारतीय प्रधानमंत्री
दौरे के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री मोदी न्यूजीलैंड के ऑकलैंड जाएंगे, जहां उनकी मुलाकात प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन से होगी। लगभग 40 वर्षों बाद किसी भारतीय प्रधानमंत्री की यह पहली न्यूजीलैंड यात्रा होगी, जिससे दोनों देशों के संबंधों में नया अध्याय जुड़ने की उम्मीद है। हाल में हुए मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद व्यापार, कृषि, डेयरी, प्रौद्योगिकी, निवेश और नवाचार के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर विशेष जोर रहेगा। दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को दोगुना करने का लक्ष्य भी तय किया है।
प्रवासी भारतीयों और इंडो-पैसिफिक रणनीति को मिलेगा नया आयाम
न्यूजीलैंड में रहने वाले लगभग तीन लाख भारतीय मूल के लोगों से प्रधानमंत्री मोदी संवाद भी करेंगे। प्रवासी भारतीय समुदाय दोनों देशों के बीच आर्थिक और सांस्कृतिक रिश्तों की मजबूत कड़ी माना जाता है। प्रधानमंत्री की यह तीन देशों की यात्रा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की एक्ट ईस्ट नीति, महासागर विजन और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ती रणनीतिक भूमिका को भी नई मजबूती देने वाली साबित हो सकती है। रक्षा, व्यापार, तकनीक, संस्कृति और क्षेत्रीय सुरक्षा के कई अहम मुद्दों पर यह दौरा भारत की वैश्विक कूटनीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।