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6 साल का ‘क्रिकेट किड’ तारुष शर्मा, 40 मीटर के छक्कों से मचा रहा धमाल

राजस्थान के भरतपुर जिले का 6 वर्षीय तारुष शर्मा इन दिनों अपनी क्रिकेट प्रतिभा से हर किसी को हैरान कर रहा है। यूकेजी में पढ़ने वाला यह बच्चा रोजाना करीब 1100 गेंदों का सामना करता है और अंडर-19 खिलाड़ियों के साथ नेट प्रैक्टिस करता है। उसकी बल्लेबाजी इतनी दमदार है कि वह 40 मीटर तक लंबे छक्के आसानी से जड़ देता है। छोटी उम्र में 13 बल्ले तोड़ चुके तारुष का सपना बड़ा क्रिकेटर बनना है, और उसकी मेहनत उसे लगातार खास बनाती जा रही है।

क्रिकेट के लिए दिन-रात मेहनत, रोज 1100 गेंदों का अभ्यास

तारुष शर्मा की सबसे बड़ी खासियत उसकी असाधारण मेहनत है। महज 6 साल की उम्र में वह रोजाना करीब 1100 गेंदों का सामना करता है। उसका दिन क्रिकेट के साथ शुरू होता है और क्रिकेट पर ही खत्म होता है। दोपहर से लेकर रात तक लंबे समय तक मैदान में अभ्यास करना उसकी दिनचर्या का हिस्सा बन चुका है। उसके पिता भी नेट पर गेंदबाजी कर उसका अभ्यास कराते हैं। लगातार अभ्यास ने उसकी टाइमिंग और शॉट चयन को इतना मजबूत बना दिया है कि कोच और सीनियर खिलाड़ी भी उसकी क्षमता देखकर दंग रह जाते हैं।

अंडर-19 खिलाड़ियों के साथ प्रैक्टिस, तेज गेंदबाजों से भी नहीं डर

तारुष की प्रतिभा को देखते हुए उसे अपनी उम्र के बच्चों के बजाय अंडर-19 खिलाड़ियों के साथ नेट प्रैक्टिस करने का मौका मिलता है। तेज गेंदबाजों की गेंदों का सामना वह आत्मविश्वास के साथ करता है। इतनी कम उम्र में उसका फुटवर्क और शॉट खेलने की क्षमता बेहद प्रभावशाली मानी जाती है। अभ्यास के दौरान अब तक उसके 13 बल्ले टूट चुके हैं, जो उसकी ताकत और आक्रामक खेल शैली को दर्शाता है। यही वजह है कि वह अपनी अकादमी का सबसे चर्चित और पसंदीदा खिलाड़ी बन चुका है।

रोहित शर्मा से प्रेरणा, पिता ने बनाया क्रिकेट को सपना

तारुष की क्रिकेट यात्रा की शुरुआत एक प्रेरणादायक कहानी से जुड़ी है। तीन साल की उम्र में उसने अपने पिता के साथ आईपीएल मैच देखा, जहां रोहित शर्मा से मिलने की इच्छा ने उसके सपनों को आकार दिया। पिता ने उसे समझाया कि खिलाड़ी बनकर ही उससे मिला जा सकता है, और यही बात उसके जीवन का टर्निंग पॉइंट बन गई। इसके बाद से क्रिकेट उसके लिए सिर्फ खेल नहीं बल्कि जुनून बन गया। परिवार भी उसके सपने को पूरा करने में पूरी तरह जुट गया है।

छोटी उम्र में बड़ा टैलेंट, भविष्य में उम्मीदें और भी बड़ी

तारुष सिर्फ बल्लेबाज ही नहीं बल्कि गेंदबाजी में भी खास क्षमता रखता है। वह दोनों हाथों से गेंदबाजी कर सकता है, जो उसकी प्रतिभा को और खास बनाता है। उसकी फिटनेस और खानपान पर भी पूरा ध्यान दिया जाता है, जिसमें दूध, दही और छाछ उसकी पसंदीदा चीजें हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर वह इसी तरह मेहनत करता रहा तो आने वाले समय में वह बड़े क्रिकेट स्टेडियमों में भारत का प्रतिनिधित्व कर सकता है। फिलहाल यह नन्हा क्रिकेटर अपने छोटे-से मैदान से बड़े सपनों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

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