मालाखेड़ा में ADJ कोर्ट की मांग को लेकर वकीलों का अनिश्चितकालीन धरना, न्यायिक कार्यों का बहिष्कार जारी
न्यायालय परिसर में लगातार जारी है आंदोलन
अलवर जिले के मालाखेड़ा में स्वीकृत अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय (ADJ Court) को जल्द शुरू कराने, एसीजेएम कोर्ट की स्थापना और अधिवक्ताओं के लिए चैंबर निर्माण की मांग को लेकर अधिवक्ताओं का आंदोलन लगातार तेज होता जा रहा है। न्यायालय परिसर में वकीलों का अनिश्चितकालीन धरना जारी है। बुधवार को अधिवक्ताओं ने दोपहर बाद न्यायिक कार्यों का बहिष्कार कर अपनी मांगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन किया।
दो साल बाद भी शुरू नहीं हो सका स्वीकृत ADJ कोर्ट
अधिवक्ताओं के अनुसार, पूर्ववर्ती राज्य सरकार के कार्यकाल में मालाखेड़ा में ADJ कोर्ट की स्वीकृति दी गई थी। इसके लिए करीब दो करोड़ रुपये का बजट भी मंजूर किया गया था, लेकिन दो वर्ष से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अदालत का संचालन शुरू नहीं हो सका। इसी मुद्दे को लेकर अधिवक्ता 24 जून से लगातार आंदोलन कर रहे हैं और सरकार से जल्द कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
बैठक में लिए गए कई अहम फैसले
1 जुलाई 2026 को न्यायालय परिसर में संघर्ष समिति और अधिवक्ता संघ की बैठक आयोजित की गई। बैठक में ADJ कोर्ट को शीघ्र शुरू करने, ACJM कोर्ट खोलने और अधिवक्ताओं के लिए चैंबर निर्माण की मांग को प्रमुखता से उठाया गया। इसके अलावा अकबरपुर थाना क्षेत्र और उद्योग नगर थाना क्षेत्र को मालाखेड़ा न्यायालय के क्षेत्राधिकार में शामिल करने का प्रस्ताव भी रखा गया।
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि मांगों को लेकर सिविल न्यायाधीश एवं न्यायिक मजिस्ट्रेट, मालाखेड़ा को ज्ञापन सौंपा जाएगा। साथ ही तहसीलदार के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम भी ज्ञापन भेजकर जल्द कार्रवाई की मांग की जाएगी।
मांगें पूरी होने तक जारी रहेगा आंदोलन
अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया है कि 1 जुलाई से न्यायिक कार्यों का बहिष्कार शुरू किया गया है और जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक अनिश्चितकालीन धरना जारी रहेगा। उनका कहना है कि यह आंदोलन क्षेत्र के आम लोगों को बेहतर न्यायिक सुविधाएं दिलाने के उद्देश्य से किया जा रहा है।
वादकारियों को उठानी पड़ रही है परेशानी
अधिवक्ता संघ मालाखेड़ा के अध्यक्ष इंद्रजीत यादव ने बताया कि ADJ कोर्ट के अभाव में क्षेत्र के वादकारियों को अपने मामलों की सुनवाई के लिए करीब 35 किलोमीटर दूर अलवर जाना पड़ता है। इससे लोगों का समय और पैसा दोनों खर्च होते हैं। वरिष्ठ अधिवक्ता रामनिवास जाट और गुड्डी नायक ने भी आंदोलन को जारी रखने की बात कहते हुए सरकार से जल्द मांगें पूरी करने की अपील की।