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बुद्ध से बुलेट ट्रेन तक… सदियों पुरानी भारत-जापान दोस्ती, अब चीन की चुनौती ने बढ़ाई साझेदारी

भारत और जापान के रिश्ते सिर्फ कूटनीति तक सीमित नहीं हैं, बल्कि इनकी जड़ें सदियों पुराने सांस्कृतिक और आध्यात्मिक संबंधों में हैं। बौद्ध धर्म से लेकर मारुति कार, बुलेट ट्रेन और आज इंडो-पैसिफिक में रणनीतिक साझेदारी तक दोनों देशों का सहयोग लगातार मजबूत हुआ है। चीन की बढ़ती आक्रामकता के बीच जापानी प्रधानमंत्री के भारत दौरे को दोनों देशों के रिश्तों में नए अध्याय के रूप में देखा जा रहा है।

बौद्ध धर्म ने रखी रिश्तों की मजबूत नींव

भारत और जापान के संबंधों की शुरुआत सदियों पहले बौद्ध धर्म के प्रसार के साथ हुई थी। छठी शताब्दी में भारत से बौद्ध धर्म जापान पहुंचा और वहां की संस्कृति व समाज का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया। आज भी जापान में बौद्ध परंपरा का गहरा प्रभाव दिखाई देता है। आठवीं शताब्दी में भारतीय भिक्षु बोधिसेन का जापान जाना दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों का अहम अध्याय माना जाता है। यही सांस्कृतिक जुड़ाव दोनों देशों के बीच विश्वास और सम्मान की मजबूत नींव बना।

विवेकानंद से नेताजी तक, इतिहास में दिखी मजबूत साझेदारी

स्वामी विवेकानंद ने 1893 में शिकागो जाते समय जापान का दौरा किया था और वहां की कार्य संस्कृति व अनुशासन की खुलकर सराहना की थी। इसी दौर में उद्योगपति जमशेदजी टाटा भी जापान से प्रभावित हुए और बाद में भारतीय वैज्ञानिक शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए। वहीं द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने भारत की आजादी के संघर्ष में जापान का सहयोग लिया और आजाद हिंद फौज के गठन में भी जापान की भूमिका महत्वपूर्ण रही।

मारुति ने बदली भारतीय ऑटोमोबाइल की तस्वीर

भारत-जापान आर्थिक सहयोग का सबसे बड़ा उदाहरण मारुति-सुजुकी साझेदारी रही है। 1982 में हुए समझौते के बाद भारत में आधुनिक कार निर्माण का नया दौर शुरू हुआ। 1983 में पहली मारुति कार सड़क पर उतरी और देखते ही देखते यह भारतीय मध्यम वर्ग की पसंद बन गई। जापानी तकनीक, गुणवत्ता और प्रशिक्षण ने भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग को नई दिशा दी। इस साझेदारी ने भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी मजबूती प्रदान की।

बुलेट ट्रेन से नई ऊंचाई पर पहुंचा सहयोग

भारत और जापान का सहयोग अब हाई-स्पीड रेल परियोजना तक पहुंच चुका है। मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना जापानी तकनीक और वित्तीय सहयोग से तैयार हो रही है। इस परियोजना का बड़ा हिस्सा जापान इंटरनेशनल कोऑपरेशन एजेंसी (JICA) के कम ब्याज वाले ऋण से वित्तपोषित है। यह परियोजना सिर्फ आधुनिक परिवहन का प्रतीक नहीं, बल्कि दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक रणनीतिक भरोसे का भी उदाहरण मानी जा रही है।

चीन की चुनौती ने बढ़ाई रणनीतिक साझेदारी

हाल के वर्षों में चीन के आक्रामक रुख और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बढ़ते प्रभाव ने भारत और जापान को और करीब लाया है। दोनों देश मुक्त, सुरक्षित और नियम-आधारित इंडो-पैसिफिक क्षेत्र का समर्थन करते हैं। रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, संयुक्त सैन्य अभ्यास और महत्वपूर्ण खनिजों की सप्लाई चेन में सहयोग लगातार बढ़ रहा है। दोनों देशों की कोशिश चीन पर निर्भरता कम करने और क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने की है।

आगे और मजबूत हो सकते हैं रिश्ते

जापानी प्रधानमंत्री के भारत दौरे से रक्षा, तकनीक, निवेश, सेमीकंडक्टर, इंफ्रास्ट्रक्चर और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में नए समझौतों की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐतिहासिक विश्वास और साझा रणनीतिक हित आने वाले वर्षों में भारत-जापान संबंधों को और मजबूत बनाएंगे। बदलते वैश्विक समीकरणों के बीच यह साझेदारी एशिया ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

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