जयपुर के बाद अलवर में भी कचरे से बनेगी बिजली, 12 मेगावाट क्षमता वाले वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट का प्रस्ताव सरकार को भेजा
राजस्थान के अलवर शहर में ठोस कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। नगर निगम ने 12 मेगावाट क्षमता वाले वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट की स्थापना का प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा है। यदि इस परियोजना को मंजूरी मिलती है तो जयपुर के बाद अलवर प्रदेश का दूसरा शहर होगा, जहां कचरे से बिजली उत्पादन किया जाएगा। इस पहल से वर्षों से जमा कचरे के निस्तारण के साथ स्वच्छता, ऊर्जा उत्पादन और पर्यावरण संरक्षण को भी नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।
सरकार की मंजूरी के बाद शुरू होगी परियोजना
अलवर नगर निगम ने वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट स्थापित करने का विस्तृत प्रस्ताव राज्य सरकार को भेज दिया है। राज्य स्तर पर स्वीकृति मिलने के बाद इसे केंद्र सरकार की आवश्यक मंजूरियों के लिए आगे बढ़ाया जाएगा। परियोजना का उद्देश्य शहर में बढ़ते ठोस कचरे का वैज्ञानिक प्रबंधन करते हुए उससे उपयोगी ऊर्जा का उत्पादन करना है। यह पहल शहरी स्वच्छता व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ वैकल्पिक ऊर्जा स्रोत विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। नगर निगम का कहना है कि मंजूरी मिलते ही परियोजना पर कार्य शुरू करने की तैयारी कर ली जाएगी।
हजार टन कचरे से होगी ऊर्जा उत्पादन की प्रक्रिया
प्रस्तावित संयंत्र की क्षमता 12 मेगावाट रखी गई है। नगर निगम के अनुसार इस स्तर पर बिजली उत्पादन के लिए प्रतिदिन लगभग एक हजार टन ठोस कचरे की आवश्यकता होगी। वर्तमान में शहर और आसपास के क्षेत्रों से निकलने वाले कचरे का बड़ा हिस्सा निस्तारण के लिए एकत्र किया जाता है। यदि यह परियोजना शुरू होती है तो कचरे को ऊर्जा में बदलने की प्रक्रिया से वर्षों से जमा अपशिष्ट में लगातार कमी आएगी और लैंडफिल पर निर्भरता भी घटेगी। इससे पर्यावरणीय प्रदूषण कम करने में भी मदद मिलने की संभावना है।
पांच लाख टन से अधिक कचरे के निस्तारण पर रहेगा फोकस
अग्यारा स्थित नगर निगम के कचरा निस्तारण परिसर में वर्तमान समय में पांच लाख टन से अधिक ठोस कचरा जमा है। पहले यहां स्थापित कचरा निस्तारण संयंत्र सीमित अवधि तक ही प्रभावी ढंग से काम कर सका, जिसके बाद नगर निगम अपने स्तर पर संचालन कर रहा है। हालांकि मौजूदा व्यवस्था से पूरे कचरे का निस्तारण संभव नहीं हो पा रहा है। इसी चुनौती को देखते हुए वेस्ट-टू-एनर्जी परियोजना की योजना तैयार की गई है, ताकि पुराने और नए दोनों प्रकार के कचरे का बेहतर प्रबंधन किया जा सके।
हजारों घरों तक पहुंच सकती है बिजली
नगर निगम का अनुमान है कि प्रस्तावित 12 मेगावाट क्षमता वाले प्लांट से उत्पादित बिजली का उपयोग आसपास के क्षेत्रों के साथ शहर तक आपूर्ति के लिए किया जा सकेगा। निगम के अनुसार इस परियोजना से चार हजार से अधिक घरों की बिजली आवश्यकता पूरी करने में सहायता मिल सकती है। इससे स्थानीय स्तर पर ऊर्जा उपलब्धता बढ़ेगी और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही शहर की सफाई व्यवस्था और ऊर्जा प्रबंधन को एकीकृत मॉडल के रूप में विकसित करने का अवसर भी मिलेगा।
इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट योजना का बनेगा हिस्सा
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित वेस्ट-टू-एनर्जी प्लांट मौजूदा कचरा निस्तारण व्यवस्था से अलग परियोजना होगी। लगभग 15 करोड़ रुपये की लागत वाले इंटीग्रेटेड वेस्ट मैनेजमेंट प्रोजेक्ट के तहत इसे विकसित करने की योजना है। करीब दस वर्ष पहले स्थापित कचरा निस्तारण संयंत्र भी अपनी प्रक्रिया के अनुसार कार्य करता रहेगा। नगर निगम आयुक्त सोहन सिंह नरूका के अनुसार 12 मेगावाट क्षमता वाले इस प्लांट का प्रस्ताव सरकार को भेजा जा चुका है और आवश्यक मंजूरियां मिलते ही निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।