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भारत से बातचीत को बेताब पाकिस्तान, सख्त रुख के बाद बदले सुर; विशेषज्ञ ने खोली बयानबाजी की असल वजह

भारत के साथ हालिया तनाव के बाद पाकिस्तान लगातार बातचीत की इच्छा जता रहा है, लेकिन नई दिल्ली के स्पष्ट रुख के कारण उसे सफलता नहीं मिली है। इस बीच पाकिस्तान के कुछ नेताओं की आक्रामक बयानबाजी और युद्ध जैसी चेतावनियों के पीछे घरेलू राजनीतिक दबाव और कूटनीतिक मजबूरियों की चर्चा तेज हो गई है। वहीं, पाकिस्तान के कुछ विश्लेषकों का दावा है कि सार्वजनिक बयान और वास्तविक रणनीति में बड़ा अंतर दिखाई देता है।

भारत के सख्त रुख के बाद पाकिस्तान की बढ़ी बेचैनी

भारत-पाकिस्तान संबंधों में लंबे समय से तनाव बना हुआ है। हाल के महीनों में पाकिस्तान के कई वरिष्ठ नेताओं ने सार्वजनिक रूप से भारत के साथ बातचीत शुरू करने की इच्छा जताई है, लेकिन भारत ने स्पष्ट किया है कि आतंकवाद और बातचीत साथ-साथ नहीं चल सकते। इसी बीच पाकिस्तान के कुछ मंत्री लगातार तीखे बयान देकर घरेलू स्तर पर अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने की कोशिश करते दिखाई दिए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि भारत की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलने के कारण पाकिस्तान की कूटनीतिक बेचैनी बढ़ी है।

विशेषज्ञ का दावा- बयान कुछ और, असल रणनीति कुछ और

पाकिस्तान के राजनीतिक विश्लेषक मोईद पीरजादा ने अपने बयान में कहा कि सार्वजनिक मंचों पर दिए जा रहे आक्रामक भाषण वास्तविक नीति को नहीं दर्शाते। उनके अनुसार कई नेताओं के बयान घरेलू राजनीतिक संदेश देने के लिए होते हैं, जबकि दूसरी ओर संवाद की संभावनाओं पर भी प्रयास जारी रहते हैं। उन्होंने यह भी दावा किया कि अनौपचारिक स्तर पर संपर्क बढ़ाने की कोशिशें की जा रही हैं ताकि भविष्य में बातचीत का रास्ता खुल सके। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

पाकिस्तानी मीडिया ने बातचीत ठप होने पर उठाए सवाल

पाकिस्तान के प्रमुख अखबारों में भी भारत-पाक संबंधों को लेकर चर्चा तेज है। कुछ संपादकीयों में दावा किया गया कि पाकिस्तान ने कई मौकों पर बातचीत बहाल करने की इच्छा जताई, लेकिन भारत ने सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं दी। लेखों में यह भी कहा गया कि दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी और लगातार बढ़ते तनाव ने शांति प्रक्रिया को मुश्किल बना दिया है। हालांकि भारत की ओर से पहले ही स्पष्ट किया जा चुका है कि सीमा पार आतंकवाद खत्म होना किसी भी सार्थक वार्ता की पहली शर्त है।

सिंधु जल संधि और सुरक्षा मुद्दे बने प्रमुख विवाद

दोनों देशों के बीच सुरक्षा और जल संसाधनों से जुड़े मुद्दे लगातार तनाव का कारण बने हुए हैं। पाकिस्तान में कुछ वर्गों ने सिंधु जल संधि से जुड़े भारत के फैसलों पर आपत्ति जताई है, जबकि भारत का कहना है कि वह अपने राष्ट्रीय हितों और सुरक्षा प्राथमिकताओं के अनुरूप निर्णय ले रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक सीमा पार आतंकवाद, सुरक्षा और विश्वास बहाली जैसे मुद्दों पर ठोस प्रगति नहीं होती, तब तक द्विपक्षीय संबंधों में बड़ा बदलाव संभव नहीं दिखता।

क्या निकट भविष्य में बातचीत संभव है?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दोनों देशों के बीच औपचारिक वार्ता तभी आगे बढ़ सकती है जब सुरक्षा संबंधी चिंताओं पर ठोस प्रगति हो। फिलहाल सार्वजनिक बयानबाजी और कूटनीतिक संकेत अलग-अलग दिशा में दिखाई दे रहे हैं। ऐसे में भविष्य की किसी भी बातचीत की संभावना दोनों देशों के राजनीतिक निर्णयों और क्षेत्रीय परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।

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