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धौलपुर में कथित प्राचीन प्रतिमा का दावा जांच में निराधार, अवैध मंदिर निर्माण पर प्रशासन की कार्रवाई

राजस्थान के धौलपुर जिले के राजाखेड़ा क्षेत्र में कथित प्राचीन प्रतिमा मिलने के बाद शुरू हुए मंदिर निर्माण पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में प्रतिमा मिलने का दावा प्रथम दृष्टया निराधार पाए जाने के बाद प्रशासन ने निर्माण कार्य रुकवाकर अतिक्रमण हटाया और प्रतिमा को सम्मानपूर्वक पुलिस अभिरक्षा में सुरक्षित रखवा दिया। अधिकारियों का कहना है कि धार्मिक आस्था की आड़ में सरकारी भूमि और रास्ते पर कब्जे का प्रयास किया जा रहा था।

प्रतिमा मिलने के दावे से जुटने लगी थी श्रद्धालुओं की भीड़

करीब दस दिन पहले मछरिहा गांव में एक किसान ने खेत के पास सूखे पेड़ की जड़ों की सफाई के दौरान एक प्रतिमा मिलने का दावा किया। स्थानीय लोगों ने इसे खाटू श्याम की प्राचीन प्रतिमा मान लिया, जिसके बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां पहुंचने लगे। पूजा-अर्चना और चढ़ावे का सिलसिला शुरू हो गया तथा मौके पर मंदिर निर्माण की तैयारी भी शुरू कर दी गई। कुछ ही दिनों में यह स्थान धार्मिक गतिविधियों का केंद्र बन गया और आसपास के क्षेत्रों से भी लोग दर्शन के लिए पहुंचने लगे।

जांच में प्रशासन को मिले कई संदिग्ध तथ्य

सोमवार को गांव में आयोजित प्रशासनिक शिविर के दौरान उपखंड स्तरीय अधिकारियों ने मौके का निरीक्षण किया। जांच में अधिकारियों को कई ऐसे तथ्य मिले, जिनसे प्रतिमा के प्राचीन होने के दावे पर संदेह पैदा हुआ। प्रशासन के अनुसार प्रतिमा नई प्रतीत हुई और जिस स्थान से उसके मिलने का दावा किया गया था, वहां गहरी खुदाई के कोई स्पष्ट प्रमाण नहीं मिले। अधिकारियों ने आशंका जताई कि धार्मिक आस्था का सहारा लेकर जमीन के उपयोग और अन्य लाभ हासिल करने का प्रयास किया जा रहा था।

मंदिर निर्माण हटाया, प्रतिमा को सम्मानपूर्वक सुरक्षित रखा

स्थिति स्पष्ट होने के बाद प्रशासन ने दिहोली पुलिस की सहायता से निर्माणाधीन ढांचे को हटवा दिया। साथ ही प्रतिमा को पूरे सम्मान के साथ पुलिस अभिरक्षा में सुरक्षित रखवा दिया गया। प्रशासन ने कहा कि कार्रवाई का उद्देश्य किसी धार्मिक भावना को आहत करना नहीं, बल्कि कानून व्यवस्था बनाए रखना और अवैध कब्जे को रोकना है। मौके पर पुलिस बल की मौजूदगी में पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न कराई गई।

धर्म की आड़ में कब्जा बर्दाश्त नहीं: प्रशासन

प्रशासन ने स्पष्ट किया कि सरकार सभी धार्मिक स्थलों और लोगों की आस्था का सम्मान करती है, लेकिन धर्म के नाम पर सरकारी भूमि या रास्तों पर कब्जा करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। अधिकारियों के अनुसार मामले की जांच आगे भी जारी रहेगी और यदि किसी प्रकार की अनियमितता सामने आती है तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। साथ ही लोगों से अपील की गई है कि किसी भी दावे पर विश्वास करने से पहले प्रशासनिक जांच के निष्कर्षों का इंतजार करें।

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