PoJK में पाकिस्तान के खिलाफ उबाल, स्थानीय नेता की चेतावनी से बढ़ी हलचल
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) में आर्थिक बदहाली और प्रशासनिक नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। रावलकोट समेत कई इलाकों में हजारों लोग सड़कों पर उतरकर सब्सिडी, बिजली और खाद्यान्न जैसी मूलभूत सुविधाओं की मांग कर रहे हैं। इसी बीच एक स्थानीय नेता के बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है।
रावलकोट में बड़े प्रदर्शन, सरकार के खिलाफ नाराजगी
पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (PoJK) के रावलकोट और आसपास के क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग प्रदर्शन कर रहे हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें लंबे समय से जरूरी सुविधाओं और सरकारी वादों का लाभ नहीं मिला। आंदोलन में महिलाएं, युवा और बुजुर्ग भी शामिल हैं।
अमन खान का बयान बना चर्चा का केंद्र
आंदोलन के दौरान स्थानीय नेता अमन खान ने कहा कि यदि खाद्यान्न और अन्य जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति बाधित होती रही, तो क्षेत्र के लोगों के पास दूसरे विकल्पों पर विचार करने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचेगा। उन्होंने संकेत दिया कि मौजूदा हालात जारी रहे तो पाकिस्तान सरकार के लिए स्थिति संभालना मुश्किल हो सकता है।
सब्सिडी और बिजली को लेकर बढ़ा असंतोष
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे लंबे समय से गेहूं, आटा और बिजली पर राहत की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि पहले किए गए आश्वासनों को लागू नहीं किया गया। साथ ही क्षेत्र में उत्पन्न जलविद्युत का लाभ स्थानीय लोगों को पर्याप्त रूप से नहीं मिल रहा, जबकि बिजली के बिल लगातार बढ़ रहे हैं।
सुरक्षा बलों की कार्रवाई पर भी उठे सवाल
स्थानीय संगठनों का दावा है कि प्रदर्शन रोकने के लिए सुरक्षा बलों ने कड़ी कार्रवाई की, जिससे हालात और तनावपूर्ण हो गए। विभिन्न दावों में हताहतों की संख्या को लेकर अलग-अलग आंकड़े सामने आए हैं। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
JAAC के नेतृत्व में जारी है आंदोलन
यह आंदोलन संयुक्त अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के नेतृत्व में चल रहा है। संगठन का कहना है कि जब तक लोगों की आर्थिक और सामाजिक मांगों पर ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
आर्थिक संकट बना सबसे बड़ा मुद्दा
विशेषज्ञों का मानना है कि PoJK में बढ़ती महंगाई, बेरोजगारी, बिजली संकट और खाद्यान्न संबंधी समस्याएं स्थानीय असंतोष की प्रमुख वजह हैं। लगातार बिगड़ती आर्थिक स्थिति ने लोगों के बीच सरकार के प्रति नाराजगी को और बढ़ाया है।