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अलवर लिपिक भर्ती घोटाला: 10 अधिकारी-कर्मचारियों पर चार्जशीट की तैयारी, सरकार ने मांगे प्रस्ताव

अलवर जिला परिषद कार्यालय और लिपिक भर्ती घोटाले से जुड़ी फाइलें

अलवर जिले की वर्ष 2022 की लिपिक भर्ती में कथित अनियमितताओं के मामले में बड़ी कार्रवाई की तैयारी है। जांच के आधार पर दोषी पाए गए 10 अधिकारी-कर्मचारियों के खिलाफ चार्जशीट जारी करने की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। राज्य सरकार ने जिला परिषद से इस संबंध में औपचारिक प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए हैं। मामला भर्ती प्रक्रिया में गड़बड़ी और प्रशासनिक स्तर पर लापरवाही से जुड़ा बताया जा रहा है, जिस पर अब शासन स्तर पर सख्ती बढ़ती दिख रही है।

सरकार ने जिला परिषद से मांगे चार्जशीट प्रस्ताव

पंचायती राज विभाग के संयुक्त शासन सचिव जसवंत सिंह की ओर से अलवर जिला परिषद के मुख्य कार्यकारी अधिकारी को पत्र भेजा गया है। इसमें स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि लिपिक भर्ती प्रकरण में अब तक की जांच में दोषी पाए गए कार्मिकों के खिलाफ चार्जशीट के प्रस्ताव बिना देरी के तैयार कर सरकार को भेजे जाएं। जानकारी के अनुसार, जिन 10 कार्मिकों पर कार्रवाई प्रस्तावित है, उनमें दो अधिकारी भी शामिल हैं, जो वर्तमान में अन्य जिलों में पदस्थापित हैं। इस निर्देश के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल तेज हो गई है।

गोपनीय पत्र को लेकर उठे सवाल

मामले में एक और विवाद उस समय सामने आया जब सरकार द्वारा भेजा गया एक महत्वपूर्ण और गोपनीय पत्र जिला परिषद तक समय पर नहीं पहुंच पाया। बताया जा रहा है कि कुछ कर्मचारियों के पास यह पत्र पहुंचने ही नहीं दिया गया और बाद में इसकी जानकारी अन्य माध्यमों से प्रशासन को मिली। इसके बाद पत्र को पुनः मंगवाया गया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर यह भी सवाल उठे हैं कि पत्र को दबाने या डिलीट करने का प्रयास किस स्तर पर हुआ, जिसकी जांच भी शुरू कर दी गई है।

पहले की कार्रवाई और सुनवाई पर भी सवाल

सूत्रों के अनुसार, इससे पहले भी इस मामले में संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के आरोप पत्र सरकार द्वारा जिला परिषद से मंगवाए गए थे। हालांकि जिला परिषद स्तर पर 8 सितंबर 2025 को व्यक्तिगत सुनवाई की प्रक्रिया पूरी की गई, लेकिन किसी ठोस कार्रवाई के बजाय केवल जवाब सरकार को भेज दिए गए। इस देरी के कारण अब तक अंतिम निर्णय लंबित रहा। इसी वजह से सरकार ने अब फिर से स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए चार्जशीट प्रस्ताव भेजने को कहा है।

जिला प्रमुख के निर्णय को भी नहीं मिली मंजूरी

इस प्रकरण में तत्कालीन जिला प्रमुख ने 19 अगस्त 2025 को सुनवाई करते हुए कुछ अधिकारियों को दोषमुक्त करने का पत्र सरकार को भेजा था। लेकिन राज्य सरकार ने इस निर्णय को स्वीकार नहीं किया और पुनः जांच एवं टिप्पणी के साथ प्रस्ताव भेजने के निर्देश दिए। बताया जा रहा है कि यह मामला बर्खास्त लिपिकों की नियुक्ति में कथित अनियमितताओं से जुड़ा है, जिनमें रूक्मणी नंदन शर्मा, सीमा गुर्जर और कृष्णा शर्मा के नाम प्रमुख रूप से सामने आए हैं। अब इस पूरे प्रकरण में आगे की कार्रवाई पर निगाहें टिकी हैं।

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