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अलवर शिशु गृह की दृष्टिबाधित बच्ची को मिलेगा नया परिवार, अमेरिका में खुलेगा बेहतर भविष्य का द्वार

अलवर शिशु गृह में रह रही विशेष आवश्यकता वाली बच्ची

अलवर से एक सकारात्मक और भावुक खबर सामने आई है। शिशु गृह में रह रही विशेष आवश्यकता (स्पेशल नीड्स) वाली एक दृष्टिबाधित बच्ची को जल्द ही अमेरिका में नया परिवार मिलने की संभावना है। एक अमेरिकी महिला ने बच्ची को गोद लेने के लिए आवेदन किया है। विभागीय मंजूरी के बाद कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर बच्ची नए परिवार के साथ विदेश जाएगी। यह पहल विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

लावारिस मिली बच्ची को मिला नए जीवन का अवसर

शिशु गृह में रह रही इस बच्ची को जन्म के कुछ समय बाद लावारिस अवस्था में पाया गया था। शुरुआती समय में लगी गंभीर चोट के कारण उसकी एक आंख की रोशनी चली गई। चिकित्सकीय उपचार और विशेषज्ञ संस्थानों में इलाज के प्रयासों के बावजूद उसकी दृष्टि वापस नहीं आ सकी। विशेष आवश्यकता वाली होने के कारण लंबे समय तक उसे गोद लेने के लिए कोई भारतीय परिवार आगे नहीं आया। अब एक अमेरिकी महिला ने उसे अपनाने की इच्छा जताई है, जिससे बच्ची के जीवन में नई उम्मीद जगी है।

विभागीय मंजूरी के बाद पूरी होगी गोद लेने की प्रक्रिया

अधिकारियों के अनुसार, बच्ची को गोद लेने के लिए संबंधित विभागों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिलने की प्रक्रिया जारी है। आवश्यक स्वीकृतियां मिलने के बाद भारतीय कानून और निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत गोद लेने की सभी औपचारिकताएं पूरी की जाएंगी। पूरी प्रक्रिया पारदर्शी और कानूनी मानकों के अनुरूप संपन्न होती है, जिससे बच्चे के हितों और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।

पहले भी विदेशी परिवार अपना चुके हैं विशेष आवश्यकता वाले बच्चे

अलवर शिशु गृह से इससे पहले भी कई विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को विदेशी परिवारों ने गोद लिया है। वर्ष 2016 और 2018 में दो बच्चियों को इटली के परिवारों ने अपनाया था, जबकि वर्ष 2022 में एक दिव्यांग बालक को अमेरिका के एक परिवार ने नया घर दिया। अधिकारियों का कहना है कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को गोद लेने के लिए विदेशी परिवार अपेक्षाकृत अधिक आवेदन करते हैं, जबकि भारत में ऐसे मामलों में आवेदन कम प्राप्त होते हैं।

दो माह में मिलीं तीन नवजात बच्चियां

शिशु गृह के अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो महीनों में अलवर के अलग-अलग क्षेत्रों से तीन नवजात बच्चियां लावारिस अवस्था में मिली हैं। नियमानुसार सभी बच्चों को पहले बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने और बच्चे को गोद लेने के लिए विधिक रूप से पात्र घोषित किए जाने के बाद ही दत्तक ग्रहण की प्रक्रिया शुरू की जाती है। अधिकारियों ने कहा कि प्रत्येक बच्चे को सुरक्षित और स्नेहपूर्ण परिवार उपलब्ध कराना उनकी प्राथमिकता है।

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