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‘भारत के पड़ोस में कई कठिन चुनौतियां’, अमेरिकी राजदूत का बड़ा बयान; भारत-अमेरिका साझेदारी पर दिया जोर

भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने भारत की सुरक्षा चुनौतियों और भारत-अमेरिका संबंधों को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने कहा कि भारत ऐसे क्षेत्र में स्थित है, जहां उसे कई कठिन पड़ोसियों और जटिल भू-राजनीतिक परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। साथ ही उन्होंने भरोसा जताया कि दोनों देश रक्षा, तकनीक, व्यापार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता समेत कई क्षेत्रों में सहयोग को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

‘भारत चुनौतीपूर्ण पड़ोस में स्थित है’

IX USISPF लीडरशिप समिट 2026 के दौरान सर्जियो गोर ने कहा कि भारत दुनिया के ऐसे क्षेत्र में स्थित है, जहां सुरक्षा संबंधी चुनौतियां लगातार बनी रहती हैं। उन्होंने बिना किसी देश का नाम लिए कहा कि भारत के कुछ पड़ोसी बेहद कठिन हैं और क्षेत्रीय हालात कभी भी बदल सकते हैं। गोर का कहना था कि ऐसे माहौल में मजबूत रणनीतिक साझेदारियां पहले से अधिक महत्वपूर्ण हो जाती हैं।

भारत-अमेरिका सहयोग को बताया मजबूत

अपने संबोधन में अमेरिकी राजदूत ने कहा कि भारत और अमेरिका के बीच कई साझा हित हैं, जो आने वाले वर्षों में दोनों देशों को और करीब लाएंगे। उन्होंने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा, तकनीक, एविएशन, व्यापार और नवाचार जैसे क्षेत्रों में दोनों देशों के पास मिलकर काम करने की अपार संभावनाएं हैं। उनके अनुसार, अगले कुछ वर्ष द्विपक्षीय संबंधों के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

‘रिश्तों को लेकर फैलाई जा रही अटकलें गलत’

सर्जियो गोर ने उन दावों को भी खारिज किया, जिनमें भारत-अमेरिका संबंधों में तनाव की बात कही जाती है। उन्होंने कहा कि वास्तविक स्थिति इसके विपरीत है और दोनों सरकारें लगभग हर महत्वपूर्ण क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए लगातार काम कर रही हैं। गोर के मुताबिक, भारत में अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने दोनों देशों के बीच नई साझेदारियों और अवसरों को तेजी से आगे बढ़ते देखा है।

मोदी-ट्रंप संबंधों का भी किया जिक्र

अमेरिकी राजदूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच वर्षों से बने कार्य संबंधों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ट्रंप के पहले कार्यकाल से ही दोनों नेताओं के बीच अच्छा तालमेल रहा है, जिसकी झलक ‘हाउडी मोदी’ और ‘नमस्ते ट्रंप’ जैसे बड़े आयोजनों में भी देखने को मिली। उनके अनुसार, इसी आपसी विश्वास ने रक्षा, हिंद-प्रशांत सुरक्षा, व्यापार और रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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