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40 साल पुरानी कॉलोनी पर वक्फ विवाद, 200 परिवार चिंतित


झुंझुनूं की इंदिरा नगर आवासीय योजना पर वक्फ बोर्ड अधिकरण के आदेश के बाद बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। करीब 40 साल पुरानी इस कॉलोनी में रहने वाले सैकड़ों परिवारों के सामने अपने आशियानों को लेकर अनिश्चितता की स्थिति बन गई है। हालांकि आदेश में बेदखली का कोई निर्देश नहीं है, फिर भी लोगों में डर और असमंजस का माहौल है। स्थानीय निवासियों ने नगर परिषद से हाईकोर्ट में अपील करने की मांग की है।

इंदिरा नगर योजना पर वक्फ बोर्ड के आदेश से बढ़ी चिंता

झुंझुनूं शहर की इंदिरा नगर आवासीय योजना, जिसे करीब चार दशक पहले नगर परिषद ने विकसित किया था, अब कानूनी विवाद के केंद्र में है। वक्फ बोर्ड अधिकरण, जयपुर द्वारा 30 मार्च 2026 को दिए गए आदेश के बाद भूमि के स्वामित्व और उपयोग को लेकर स्थिति जटिल हो गई है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि जिन भूखंडों का विक्रय नहीं हुआ है, उन पर आगे कोई बिक्री या आवंटन नहीं किया जाएगा, साथ ही पट्टे और एनओसी जारी करने पर भी रोक लगाई गई है।

2004 से लंबित केस का फैसला बना विवाद की वजह

स्थानीय निवासियों के अनुसार यह मामला वर्ष 2004 से न्यायालय में विचाराधीन था। लोगों का आरोप है कि नगर परिषद द्वारा मामले में प्रभावी पैरवी नहीं की गई, जिससे अंततः स्थिति उनके खिलाफ चली गई। हालांकि आदेश में मौजूदा निवासियों को बेदखल करने का कोई उल्लेख नहीं है, लेकिन कानूनी निर्णय के बाद कॉलोनीवासियों में भविष्य को लेकर गंभीर चिंता बढ़ गई है। प्रशासनिक चुप्पी ने भी लोगों की परेशानी को और बढ़ा दिया है।

200 से अधिक परिवार और सार्वजनिक स्थल भी दायरे में

इंदिरा नगर की इस विवादित भूमि में ए ब्लॉक के करीब 150 और बी-सी ब्लॉक के लगभग 50 मकान शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा क्षेत्र का मुक्तिधाम भी इस विवाद के दायरे में आ रहा है। कई परिवारों के पट्टे पिछले 20 वर्षों से लंबित हैं, जिससे लोगों की समस्याएं और गहरी हो गई हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे वर्षों से यहां रह रहे हैं, ऐसे में अचानक आए फैसले से उनका भविष्य असमंजस में पड़ गया है।

नगर परिषद से हाईकोर्ट जाने की मांग तेज

कॉलोनीवासियों ने जिला प्रशासन और नगर परिषद को ज्ञापन सौंपकर तुरंत हाईकोर्ट में अपील दायर करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते कानूनी कदम नहीं उठाए गए तो उनके वर्षों पुराने घर खतरे में पड़ सकते हैं। निवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे।

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