मोरेल डैम से अरबों लीटर पानी बहा व्यर्थ, 9 KM लिफ्ट प्रोजेक्ट बदल सकता है 40 गांवों की तस्वीर
दौसा जिले के लालसोट क्षेत्र स्थित मोरेल नदी पर बने एशिया के सबसे बड़े कच्चे बांध मोरेल डैम में पिछले दो वर्षों में रिकॉर्ड बारिश के कारण क्षमता से कई गुना अधिक पानी आया, लेकिन जल प्रबंधन की कमी के चलते यह अरबों लीटर पानी ओवरफ्लो होकर बह गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मात्र 9 किलोमीटर की लिफ्ट सिंचाई परियोजना लागू की जाए तो आसपास के दर्जनों गांवों की जल समस्या का स्थायी समाधान संभव है।
दो वर्षों में कई गुना भरा मोरेल डैम, फिर भी बह गया पानी
मोरेल डैम, जिसे एशिया का सबसे बड़ा कच्चा बांध माना जाता है, वर्ष 2024 और 2025 में लगातार भारी बारिश के चलते अपनी क्षमता से कई गुना अधिक भर गया। जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार 2024 में लगभग 8000 मिलियन घन फीट पानी की आवक दर्ज हुई, जबकि 2025 में यह आंकड़ा करीब 12 हजार मिलियन घन फीट तक पहुंच गया। दोनों वर्षों में इतनी अधिक जलराशि आई कि बांध कई बार भरने की स्थिति से भी आगे निकल गया, लेकिन उचित प्रबंधन के अभाव में अतिरिक्त पानी मोरेल, बनास और चंबल नदी के रास्ते समुद्र में बह गया।
आसपास के गांवों में सूखा, खेत और पेयजल संकट गहराया
जहां एक ओर मोरेल डैम में पानी की अधिकता रही, वहीं कुछ ही दूरी पर स्थित राहुवास, दक्षिण बिनोरी सागर और खारली जैसे बांध खाली पड़े रहे। पानी की कमी के कारण क्षेत्र में भूजल स्तर लगातार नीचे गिरता गया। किसानों को सिंचाई के लिए गहरे बोरवेल पर निर्भर रहना पड़ा, जबकि ग्रामीण इलाकों में पेयजल संकट भी गंभीर होता गया। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इस जल का वैज्ञानिक रूप से संरक्षण किया जाता तो क्षेत्र की जल समस्या काफी हद तक समाप्त हो सकती थी।
9 किलोमीटर लिफ्ट प्रोजेक्ट से बदल सकती है 40 गांवों की तस्वीर
जल विशेषज्ञों के अनुसार यदि मोरेल डैम के ओवरफ्लो पानी को केवल 9 किलोमीटर दूर स्थित दक्षिण सागर बांध तक लिफ्ट तकनीक से पहुंचाया जाए, तो पूरे क्षेत्र में बड़ा बदलाव संभव है। इस परियोजना से लालसोट क्षेत्र के करीब 40 गांवों का भूजल स्तर सुधर सकता है। साथ ही लगभग 1660 हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिल सकता है। यह योजना न केवल पेयजल संकट को कम करेगी, बल्कि क्षेत्र की कृषि अर्थव्यवस्था को भी मजबूत बनाएगी।
एक्सपर्ट राय: जुड़े बांधों से मिलेगा व्यापक लाभ
सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी बी.एम. मीना के अनुसार दक्षिण सागर और सिंथोली बांध आपस में जुड़े हुए हैं। यदि मोरेल डैम के अतिरिक्त पानी को इन बांधों तक पहुंचाया जाए तो डिवाचली और पीपलाई बांध भी स्वतः भर सकते हैं। इससे बामनवास क्षेत्र के लगभग 30 गांवों का जल स्तर भी सुधरेगा। उनका मानना है कि यह परियोजना भविष्य में कम वर्षा की स्थिति में भी क्षेत्र को जल संकट से सुरक्षित रख सकती है और स्थायी जल प्रबंधन का मॉडल बन सकती है।