तेजस्वी यादव का एनडीए सरकार पर तीखा हमला, टेंडर घोटाले और वित्तीय संकट को लेकर उठाए सवाल
बिहार की राजनीति में एक बार फिर सियासी तापमान बढ़ गया है। नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने रविवार को आरजेडी कार्यालय में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर एनडीए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने टेंडर घोटाले, कथित भ्रष्टाचार, और राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। तेजस्वी ने दावा किया कि कई बड़े सरकारी टेंडरों में अनियमितताओं की जांच के दौरान उच्च स्तर तक कड़ियां जुड़ती दिख रही हैं। उनके इन बयानों के बाद राज्य में राजनीतिक बहस तेज हो गई है और सत्तापक्ष–विपक्ष के बीच टकराव बढ़ गया है।
टेंडर घोटाले में बड़े नेटवर्क के शामिल होने का आरोप
प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि बिहार में कई विभागों के टेंडर वर्षों से एक ही कथित नेटवर्क के जरिए संचालित हो रहे हैं। उन्होंने दावा किया कि जांच एजेंसियों की चार्जशीट में वरिष्ठ अधिकारियों, कुछ प्रभावशाली प्रशासनिक पदाधिकारियों और कथित तौर पर मंत्री स्तर तक के नाम सामने आ रहे हैं। तेजस्वी ने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी अनियमितताओं के बावजूद निगरानी तंत्र पहले क्यों सक्रिय नहीं हुआ। उन्होंने यह भी कहा कि जांच का दायरा अक्सर निचले स्तर तक ही सीमित रह जाता है, जबकि वास्तविक जिम्मेदारी तय करने में देरी होती है।
CMO तक कड़ियों के जुड़े होने का गंभीर आरोप
तेजस्वी यादव ने टेंडर घोटाले को लेकर सबसे गंभीर आरोप यह लगाया कि इसकी कड़ियां मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) तक जुड़ती हैं। हालांकि उन्होंने किसी दस्तावेज या आधिकारिक रिपोर्ट का सार्वजनिक रूप से हवाला नहीं दिया, लेकिन उन्होंने कहा कि जांच के दौरान कई स्तरों पर समन्वय और निर्णय प्रक्रिया में संदिग्ध गतिविधियों के संकेत मिल रहे हैं। उन्होंने सरकार से मांग की कि इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके और दोषियों की पहचान सुनिश्चित की जा सके।
सम्राट चौधरी की कार्यशैली पर उठाए सवाल
तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व और प्रशासनिक भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार में निर्णय लेने की प्रक्रिया स्वतंत्र नहीं है और कई फैसले बाहरी दबाव में लिए जा रहे हैं। तेजस्वी ने यह भी कहा कि सरकार जनता के मूल मुद्दों की बजाय औपचारिक प्रशासनिक प्रक्रियाओं और राजनीतिक दिखावे पर अधिक ध्यान दे रही है। उनके अनुसार, इससे शासन की पारदर्शिता और प्रभावशीलता पर सवाल उठते हैं, जिससे आम जनता के हित प्रभावित हो रहे हैं।
बिहार की वित्तीय स्थिति को लेकर गंभीर चिंता जताई
प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव ने राज्य की आर्थिक स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने दावा किया कि बिहार में वित्तीय अनुशासन कमजोर हुआ है और राजस्व घाटा बढ़ रहा है। उन्होंने हाल ही में कंटीजेंसी फंड से बड़ी राशि के उपयोग पर भी सवाल उठाए और कहा कि यह सामान्य प्रशासनिक वित्तीय प्रबंधन पर दबाव को दर्शाता है। तेजस्वी ने कहा कि कर्मचारियों के वेतन, छात्रवृत्ति और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में देरी राज्य की आर्थिक स्थिति की गंभीरता को उजागर करती है।