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Operation Sindoor पर नया सियासी विवाद: 6 शहीदों के नाम सार्वजनिक होने के बाद विपक्ष ने सरकार से मांगा जवाब

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान शहीद हुए छह भारतीय जवानों के नाम राष्ट्रीय युद्ध स्मारक (नेशनल वॉर मेमोरियल) और ‘रोल ऑफ ऑनर’ में दर्ज होने के बाद देश की राजनीति गरमा गई है। कांग्रेस, आम आदमी पार्टी और आरजेडी समेत विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह पर संसद को गुमराह करने का आरोप लगाया है। वहीं सरकार की ओर से इस मुद्दे पर अभी तक कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह मामला राष्ट्रीय सुरक्षा के साथ-साथ राजनीतिक जवाबदेही का भी विषय बन गया है।

राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर दर्ज हुए छह शहीदों के नाम

‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान जान गंवाने वाले छह भारतीय सैनिकों के नाम अब आधिकारिक रूप से नई दिल्ली स्थित नेशनल वॉर मेमोरियल और ‘रोल ऑफ ऑनर’ में दर्ज कर दिए गए हैं। इनमें भारतीय सेना के पांच जवान और भारतीय वायुसेना के एक सार्जेंट शामिल हैं। शहीदों में सूबेदार मेजर पवन कुमार, राइफलमैन सुनील कुमार (वीर चक्र), लांस नायक दिनेश कुमार, एवी मुरलीनाइक, हवलदार सुनील कुमार सिंह और सार्जेंट सुरेंद्र कुमार (वायु सेना मेडल) के नाम शामिल हैं। यह पहली बार है जब ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए सैनिकों की आधिकारिक सूची सार्वजनिक हुई है।

विपक्ष का आरोप- संसद में दी गई जानकारी पर उठे सवाल

शहीदों के नाम सामने आने के बाद कांग्रेस ने सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए बयान का वीडियो साझा करते हुए कहा कि यदि ऑपरेशन के दौरान जवान शहीद हुए थे तो संसद को इसकी जानकारी क्यों नहीं दी गई। उन्होंने कहा कि या तो रक्षा मंत्री को अपने मंत्रालय के तथ्यों की जानकारी नहीं थी या फिर जानबूझकर संसद को अधूरी जानकारी दी गई। विपक्ष का कहना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों पर पारदर्शिता जरूरी है।

अन्य विपक्षी दलों ने भी सरकार को घेरा

आम आदमी पार्टी और राष्ट्रीय जनता दल ने भी इस मुद्दे पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। आम आदमी पार्टी ने आरोप लगाया कि सरकार ने शहीदों की कुर्बानी को समय रहते सार्वजनिक नहीं किया। वहीं आरजेडी ने संसद में दिए गए बयानों और अब सामने आई सूची के बीच विरोधाभास का मुद्दा उठाया। उत्तर प्रदेश कांग्रेस के नेता दीपक सिंह ने कहा कि सैनिकों की शहादत पर किसी भी प्रकार का भ्रम या विरोधाभासी जानकारी देश और शहीद परिवारों की भावनाओं को आहत करती है। विपक्ष का कहना है कि सरकार को पूरे घटनाक्रम पर स्पष्ट स्थिति रखनी चाहिए।

ऑपरेशन सिंदूर क्या था?

22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने पाकिस्तान के खिलाफ सीमित सैन्य अभियान चलाया था, जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया। यह अभियान लगभग चार दिनों तक चला। उसी दौरान पाकिस्तान ने भी दावा किया था कि उसके 11 सैनिक मारे गए हैं। अब भारतीय सैनिकों की शहादत के आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने के बाद इस सैन्य अभियान को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है।

सरकार की प्रतिक्रिया का इंतजार

विपक्षी दल लगातार सरकार से स्पष्टीकरण मांग रहे हैं कि यदि ऑपरेशन के दौरान सैनिकों की शहादत हुई थी तो संसद में उस समय क्या जानकारी दी गई थी। फिलहाल केंद्र सरकार या रक्षा मंत्रालय की ओर से विपक्ष के आरोपों पर विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में यह मुद्दा आने वाले दिनों में संसद और राजनीतिक गलियारों में चर्चा का प्रमुख विषय बना रह सकता है। हालांकि यह ध्यान रखना भी आवश्यक है कि सैन्य अभियानों से जुड़ी सूचनाएं कई बार सुरक्षा कारणों से तत्काल सार्वजनिक नहीं की जातीं। ऐसे मामलों में अंतिम निष्कर्ष आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।

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