ईरान-अमेरिका तनाव फिर बढ़ा, इजरायल की अगली रणनीति पर नजर; क्या अकेले करेगा सैन्य कार्रवाई?
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर बढ़ता दिखाई दे रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच संघर्ष विराम को लेकर विरोधाभासी दावों के बीच दोनों पक्ष एक-दूसरे पर हमले के आरोप लगा रहे हैं। इसी बीच इजरायल की संभावित भूमिका को लेकर भी अटकलें तेज हो गई हैं। सवाल यह है कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो क्या इजरायल अमेरिका के साथ संयुक्त कार्रवाई करेगा या फिर अपने दम पर सैन्य अभियान चलाने का फैसला लेगा।
हमलों को लेकर अमेरिका और ईरान के अलग-अलग दावे
अमेरिका का कहना है कि उसने ईरानी मिसाइल, ड्रोन भंडारण केंद्रों और तटीय सैन्य ठिकानों को जवाबी कार्रवाई के तहत निशाना बनाया। अमेरिकी पक्ष का दावा है कि यह कार्रवाई समुद्री क्षेत्र में उसके हितों पर हुए कथित हमले के बाद की गई। दूसरी ओर ईरान ने इन हमलों की कड़ी निंदा करते हुए उन्हें किसी भी मौजूदा समझौते और कूटनीतिक प्रयासों के विपरीत बताया। तेहरान का आरोप है कि अमेरिकी कार्रवाई ने क्षेत्रीय तनाव को और बढ़ा दिया है।
ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई का किया दावा
ईरानी पक्ष का कहना है कि उसने अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाकर जवाब दिया है। वहीं अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि उनकी कार्रवाई केवल सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए थी। दोनों देशों के बयानों में स्पष्ट अंतर दिखाई दे रहा है, जिससे वास्तविक घटनाक्रम को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी स्थिति पूरी तरह साफ नहीं हो सकी है। हालांकि दोनों देशों के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता नजर आ रहा है।
इजरायल की रणनीति पर बढ़ी वैश्विक निगाहें
ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच इजरायल की अगली रणनीति पर भी दुनिया की नजर है। इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू पहले भी स्पष्ट कर चुके हैं कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में उनका देश अपने स्वतंत्र निर्णय लेने का अधिकार रखता है। ऐसे में यदि क्षेत्रीय हालात और बिगड़ते हैं तो इजरायल अमेरिका के साथ संयुक्त कार्रवाई करे या अकेले कदम उठाए, यह आने वाले दिनों की सबसे महत्वपूर्ण रणनीतिक चर्चा बन सकती है।
लेबनान मोर्चे पर कूटनीतिक कोशिशें जारी
एक ओर क्षेत्र में सैन्य तनाव बना हुआ है तो दूसरी ओर लेबनान मोर्चे पर शांति प्रयास भी जारी हैं। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार, इजरायल और लेबनान के बीच तनाव कम करने तथा सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने को लेकर बातचीत जारी है। हालांकि सीमावर्ती इलाकों में सैन्य गतिविधियां पूरी तरह समाप्त नहीं हुई हैं। ऐसे में कूटनीतिक प्रयासों के साथ सुरक्षा चुनौतियां भी बनी हुई हैं।
मध्य पूर्व में बढ़ती अनिश्चितता, दुनिया की नजर हालात पर
मध्य पूर्व में मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। अमेरिका, ईरान और इजरायल के बीच बढ़ता तनाव पूरे क्षेत्र की सुरक्षा और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर असर डाल सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान निकालने की अपील कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सभी पक्ष बातचीत और शांति प्रयासों को प्राथमिकता देते हैं तो व्यापक संघर्ष की आशंका को कम किया जा सकता है।