रूस-पाकिस्तान की बढ़ती सैन्य साझेदारी से बढ़ी भारत की चिंता, आतंकवाद विरोधी सहयोग पर बनी नई सहमति
रूस और पाकिस्तान के बीच रक्षा एवं आतंकवाद विरोधी सहयोग लगातार मजबूत होता दिख रहा है। इस्लामाबाद में हुई दोनों देशों के संयुक्त कार्य समूह (वर्किंग ग्रुप) की 12वीं बैठक में सैन्य सहयोग बढ़ाने, आतंकवाद विरोधी अभियानों में अनुभव साझा करने और सुरक्षा समन्वय को मजबूत करने पर सहमति बनी। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और पाकिस्तान की यह बढ़ती नजदीकी दक्षिण एशिया के सामरिक समीकरणों को प्रभावित कर सकती है, जिस पर भारत की भी करीबी नजर रहेगी।
आतंकवाद विरोधी सहयोग को नई गति देने पर बनी सहमति
इस्लामाबाद में आयोजित रूस-पाकिस्तान आतंकवाद विरोधी वर्किंग ग्रुप की 12वीं बैठक में दोनों देशों ने सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने का फैसला किया। बैठक में आतंकवाद से निपटने के लिए संयुक्त रणनीति, सूचनाओं के आदान-प्रदान और सैन्य अनुभव साझा करने पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने भविष्य में आतंकवाद विरोधी अभियानों के दौरान बेहतर समन्वय विकसित करने की आवश्यकता पर भी सहमति जताई। रूस और पाकिस्तान का कहना है कि बदलती सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए द्विपक्षीय सहयोग को और व्यापक बनाया जाएगा।
पाकिस्तानी विशेषज्ञ ने रूस की सैन्य क्षमता की सराहना की
पाकिस्तानी रक्षा विश्लेषक और वायु सेना के पूर्व अधिकारी सुल्तान एम ने कहा कि यह सहयोग किसी एक बैठक तक सीमित नहीं है, बल्कि दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी का हिस्सा है। उनके अनुसार, रूस को शहरी युद्ध, ड्रोन रोधी तकनीक और आतंकवाद विरोधी अभियानों का व्यापक अनुभव है, जिससे पाकिस्तान अपनी सुरक्षा क्षमताओं को मजबूत करना चाहता है। उन्होंने यह भी कहा कि रूस के साथ सहयोग से पाकिस्तान को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अपनी स्थिति मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
पिछले एक दशक में लगातार मजबूत हुए हैं दोनों देशों के रक्षा संबंध
रूस और पाकिस्तान के बीच रक्षा संबंधों में पिछले दस वर्षों के दौरान उल्लेखनीय विस्तार हुआ है। वर्ष 2014 में दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग समझौते के बाद सैन्य संबंधों को नई दिशा मिली। इसके बाद संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा संवाद और सीमित रक्षा उपकरणों की आपूर्ति जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा। रूस ने पाकिस्तान को Mi-35M अटैक हेलीकॉप्टर उपलब्ध कराए, जबकि पाकिस्तान के JF-17 लड़ाकू विमान के लिए RD-93 इंजन की आपूर्ति भी रूस द्वारा की गई। इन कदमों ने दोनों देशों के रक्षा सहयोग को नई मजबूती दी है।
क्षेत्रीय सुरक्षा समीकरणों पर पड़ सकता है असर
रूस और पाकिस्तान की बढ़ती रणनीतिक साझेदारी को दक्षिण एशिया की सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि रूस और भारत के बीच लंबे समय से मजबूत रक्षा संबंध बने हुए हैं, लेकिन पाकिस्तान के साथ बढ़ता सैन्य सहयोग क्षेत्रीय संतुलन पर असर डाल सकता है। भारत की सुरक्षा एजेंसियां और रणनीतिक विशेषज्ञ इस बदलते घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले समय में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि रूस अपनी पारंपरिक भारत नीति और पाकिस्तान के साथ बढ़ते संबंधों के बीच किस तरह संतुलन बनाता है।
भारत-रूस संबंध अब भी रणनीतिक रूप से मजबूत
विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान के साथ सहयोग बढ़ने के बावजूद भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, परमाणु सहयोग तथा रणनीतिक साझेदारी अब भी बेहद मजबूत है। दोनों देशों के बीच दशकों पुराने संबंध विभिन्न क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में रूस की पाकिस्तान नीति को भारत के साथ उसके व्यापक रणनीतिक रिश्तों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है। फिलहाल रूस दोनों देशों के साथ अलग-अलग स्तर पर अपने हितों के अनुसार संबंध बनाए रखने की कोशिश कर रहा है।