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जैश-ए-मोहम्मद से कथित जुड़ाव मामले में बबीता उर्फ खदीजा न्यायिक हिरासत में भेजी गई, ATS जांच जारी

जयपुर से गिरफ्तार बबीता उर्फ खदीजा की पाकिस्तान जाने की कथित योजना का खुलासा। ATS जांच में जैश से जुड़े संपर्क और डिजिटल सबूत मिले।

राजस्थान में जैश-ए-मोहम्मद से कथित संबंधों और ऑनलाइन ब्रेनवॉश से जुड़े संवेदनशील मामले में आरोपी बबीता उर्फ खदीजा को स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया। ATS की 7 दिन की रिमांड अवधि पूरी होने के बाद कोर्ट ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया। आरोपी पर आतंकी संगठन के संपर्क में रहने, विचारधारा से प्रभावित होने और संभावित स्लीपर सेल नेटवर्क से जुड़े होने के आरोप हैं। मामले की जांच एजेंसियां उसके डिजिटल डिवाइस और विदेशी संपर्कों की गहराई से जांच कर रही हैं।

ATS ने कोर्ट में पेश कर रिमांड समाप्त होने पर सौंपा मामला

जयपुर में ATS ने बबीता उर्फ खदीजा को स्पेशल कोर्ट में पेश किया, जहां उसकी 7 दिन की रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद आगे की हिरासत पर सुनवाई हुई। अदालत ने प्रारंभिक जांच रिपोर्ट और प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर उसे न्यायिक हिरासत में भेजने का आदेश दिया। आरोपी को जयपुर महानगर द्वितीय की स्पेशल कोर्ट में पेश किया गया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। जांच एजेंसियों का कहना है कि रिमांड अवधि में कई अहम डिजिटल और नेटवर्क संबंधी जानकारियां मिली हैं, जिनका विश्लेषण किया जा रहा है।

जयपुर के वाटिका क्षेत्र से हुई थी गिरफ्तारी

एटीएस ने बबीता उर्फ खदीजा को 20 जून को जयपुर के वाटिका क्षेत्र से गिरफ्तार किया था। वह मूल रूप से सवाई माधोपुर जिले की रहने वाली है। जांच में सामने आया कि वह पिछले कुछ वर्षों से संदिग्ध ऑनलाइन संपर्कों के जरिए सक्रिय थी। गिरफ्तारी के बाद उसे रिमांड पर लेकर पूछताछ की गई, जिसमें उसके मोबाइल और सोशल मीडिया गतिविधियों की गहन जांच की गई। अधिकारियों का कहना है कि उसके संपर्कों और चैट रिकॉर्ड से कई महत्वपूर्ण सुराग मिले हैं, जो पूरे नेटवर्क को समझने में मदद कर सकते हैं।

ऑनलाइन संपर्क और ब्रेनवॉश की आशंका पर जांच तेज

जांच एजेंसियों के अनुसार लगभग तीन साल पहले सोशल मीडिया के जरिए उसका संपर्क पाकिस्तान आधारित एक व्यक्ति से हुआ था, जो कथित तौर पर जैश-ए-मोहम्मद से जुड़ा बताया जाता है। धीरे-धीरे यह संपर्क बढ़कर विचारधारा और भावनात्मक प्रभाव तक पहुंच गया। एजेंसियों को आशंका है कि उसे ऑनलाइन ब्रेनवॉश कर स्लीपर सेल जैसी गतिविधियों के लिए तैयार किया जा रहा था। फिलहाल जांच यह भी देख रही है कि क्या उसके माध्यम से किसी अन्य व्यक्ति को भी प्रभावित किया गया है या नहीं।

मोबाइल और सिम कार्ड से खुल सकते हैं बड़े राज

जांच के दौरान आरोपी के पास से दो मोबाइल फोन और तीन सिम कार्ड बरामद किए गए हैं। इन डिवाइसों को फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है। प्रारंभिक विश्लेषण में विदेशी संपर्कों और संदिग्ध चैट्स की संभावना जताई जा रही है। एजेंसियां यह भी पता लगाने में जुटी हैं कि क्या आरोपी किसी बड़े नेटवर्क का हिस्सा थी या केवल ऑनलाइन प्रभाव में आई थी। फिलहाल पूरा मामला राष्ट्रीय सुरक्षा दृष्टिकोण से संवेदनशील माना जा रहा है और जांच तेजी से आगे बढ़ाई जा रही है।

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