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रिकॉर्ड कर्ज के बोझ तले पाकिस्तान! 81.93 ट्रिलियन रुपये पहुंचा सरकारी ऋण, शहबाज सरकार के सामने बढ़ी आर्थिक चुनौती

पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था एक बार फिर गंभीर दबाव में नजर आ रही है। सरकार भले ही आर्थिक हालात में सुधार और स्थिरता का दावा कर रही हो, लेकिन ताजा आंकड़े अलग तस्वीर पेश कर रहे हैं। केंद्र सरकार का कुल कर्ज बढ़कर 81.93 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार बढ़ता कर्ज, राजस्व की सीमित क्षमता और ऊंचे वित्तीय घाटे ने सरकार की आर्थिक चुनौतियों को और गहरा कर दिया है। ऐसे में शहबाज शरीफ सरकार के सामने आर्थिक सुधारों को तेज करने की बड़ी परीक्षा खड़ी हो गई है।

अप्रैल में रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा सरकारी कर्ज

आर्थिक रिपोर्टों के अनुसार, अप्रैल महीने में पाकिस्तान की केंद्र सरकार का कुल कर्ज लगभग 1.4 ट्रिलियन पाकिस्तानी रुपये बढ़कर 81.93 ट्रिलियन रुपये हो गया। यह अब तक का सबसे ऊंचा स्तर माना जा रहा है। आंकड़े बताते हैं कि सरकार अपने खर्चों और वित्तीय दायित्वों को पूरा करने के लिए लगातार उधारी पर निर्भर बनी हुई है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यही स्थिति जारी रही तो भविष्य में कर्ज का बोझ और बढ़ सकता है, जिससे सरकारी वित्तीय प्रबंधन पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

घरेलू और विदेशी दोनों स्रोतों से बढ़ी उधारी

रिपोर्ट के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष के पहले दस महीनों में पाकिस्तान के कुल सरकारी कर्ज में चार ट्रिलियन रुपये से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा घरेलू कर्ज का रहा, जो 3.6 ट्रिलियन रुपये से ज्यादा बढ़ा। वहीं विदेशी कर्ज में भी 400 अरब रुपये से अधिक की वृद्धि हुई। विश्लेषकों का कहना है कि बजट घाटे को पूरा करने और पुराने कर्ज की अदायगी के लिए लगातार नई उधारी लेने की रणनीति ने वित्तीय दबाव को और बढ़ा दिया है।

कर्ज के जाल में फंसती जा रही अर्थव्यवस्था

आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान लंबे समय से एक ऐसे चक्र में फंसा हुआ है, जहां पुराने कर्ज चुकाने और सरकारी खर्च चलाने के लिए नए कर्ज लेने पड़ रहे हैं। इससे वित्तीय सुधारों की प्रक्रिया कमजोर होती जा रही है। सीमित कर संग्रह, लगातार बढ़ता राजकोषीय घाटा और संरचनात्मक आर्थिक समस्याएं सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। कई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थान भी पाकिस्तान को कर सुधार, राजस्व बढ़ाने और अनावश्यक सरकारी खर्च कम करने की सलाह देते रहे हैं।

बढ़ते कर्ज का आम लोगों पर क्या असर पड़ेगा?

विशेषज्ञों के अनुसार, जब किसी देश के बजट का बड़ा हिस्सा कर्ज और उस पर लगने वाले ब्याज के भुगतान में खर्च होने लगे, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और सामाजिक कल्याण जैसी योजनाओं पर निवेश सीमित हो जाता है। इससे आर्थिक विकास की गति प्रभावित होती है और आम नागरिकों पर भी महंगाई तथा रोजगार जैसी समस्याओं का असर बढ़ सकता है। पाकिस्तान में पहले से ही ऊंची महंगाई और सीमित आर्थिक अवसरों के बीच बढ़ता कर्ज सरकार की चुनौतियों को और कठिन बना रहा है।

वैश्विक हालात भी बढ़ा रहे हैं मुश्किलें

विश्लेषकों का मानना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव का असर पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है। यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो तेल आयात पर निर्भर पाकिस्तान का आयात बिल और बढ़ेगा। इससे विदेशी मुद्रा भंडार और चालू खाते पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को टिकाऊ आर्थिक सुधारों, कर संग्रह बढ़ाने, सार्वजनिक खर्च में अनुशासन लाने और निवेश को प्रोत्साहित करने जैसी नीतियों पर तेजी से काम करना होगा, ताकि भविष्य में वित्तीय संकट को टाला जा सके।

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