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क्या है तीस्ता परियोजना? बांग्लादेश में चीन की बढ़ती मौजूदगी से भारत क्यों सतर्क

बांग्लादेश में तीस्ता नदी परियोजना को लेकर चीन की सक्रियता ने दक्षिण एशिया की रणनीतिक राजनीति को फिर चर्चा में ला दिया है। बीजिंग ने स्पष्ट किया है कि ढाका के साथ उसका सहयोग किसी तीसरे देश के खिलाफ नहीं है, लेकिन भारत इस परियोजना को केवल विकास कार्य नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन से जुड़े अहम मुद्दे के रूप में देख रहा है। आखिर तीस्ता परियोजना क्या है, चीन इसमें क्यों रुचि दिखा रहा है और भारत की चिंता की असली वजह क्या है, आइए विस्तार से समझते हैं।

तीस्ता परियोजना पर चीन का बयान, भारत की बढ़ी रणनीतिक चिंता

चीन ने बांग्लादेश की तीस्ता नदी परियोजना में सहयोग की इच्छा दोहराते हुए कहा है कि दोनों देशों के बीच होने वाला विकास सहयोग किसी तीसरे देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है। चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने परियोजना को बांग्लादेश के विकास और जनकल्याण से जुड़ा महत्वपूर्ण प्रयास बताया। यह बयान ऐसे समय आया है जब बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान के चीन दौरे के दौरान दोनों देशों के बीच कई विकास परियोजनाओं पर चर्चा हुई। हालांकि भारत इस पूरे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए है, क्योंकि तीस्ता परियोजना का भू-राजनीतिक महत्व सामान्य विकास परियोजनाओं से कहीं अधिक माना जा रहा है।

क्या है तीस्ता नदी परियोजना?

तीस्ता नदी हिमालयी क्षेत्र से निकलकर सिक्किम, पश्चिम बंगाल और फिर बांग्लादेश में प्रवेश करती है। लगभग 414 किलोमीटर लंबी यह नदी दोनों देशों की कृषि और जल संसाधन व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। बांग्लादेश लंबे समय से नदी के पुनरुद्धार, बाढ़ नियंत्रण, सिंचाई क्षमता बढ़ाने, तट संरक्षण और जल प्रबंधन के लिए व्यापक परियोजना लागू करना चाहता है। इसी उद्देश्य से प्रस्तावित ‘तीस्ता रिवर कॉम्प्रिहेंसिव मैनेजमेंट एंड रिस्टोरेशन प्रोजेक्ट’ में नदी की ड्रेजिंग, तटबंधों का निर्माण, जल प्रवाह का बेहतर प्रबंधन और आसपास के क्षेत्रों के विकास जैसी योजनाएं शामिल हैं। चीन ने इस परियोजना में निवेश और तकनीकी सहयोग देने में रुचि दिखाई है।

भारत के लिए यह परियोजना क्यों है संवेदनशील?

भारत की चिंता केवल जल संसाधनों तक सीमित नहीं है। प्रस्तावित परियोजना क्षेत्र रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलिगुड़ी कॉरिडोर के अपेक्षाकृत निकट स्थित है, जिसे ‘चिकन नेक’ भी कहा जाता है। यही संकरा भूभाग पूर्वोत्तर भारत को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ता है। किसी भी आपात स्थिति या सैन्य संकट में इस क्षेत्र का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है। ऐसे में यदि चीन किसी बड़े बुनियादी ढांचा परियोजना के माध्यम से इस इलाके के आसपास दीर्घकालिक उपस्थिति स्थापित करता है, तो भारत के लिए सुरक्षा, निगरानी और सामरिक संतुलन से जुड़े नए सवाल खड़े हो सकते हैं। यही कारण है कि भारत इस परियोजना को केवल आर्थिक सहयोग के नजरिए से नहीं देख रहा।

बांग्लादेश में लगातार बढ़ रहा है चीन का प्रभाव

पिछले कुछ वर्षों में चीन बांग्लादेश के प्रमुख विकास साझेदारों में शामिल हो चुका है। परिवहन, ऊर्जा, बंदरगाह, रेलवे और औद्योगिक परियोजनाओं में चीन ने बड़े पैमाने पर निवेश किया है। बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत भी दोनों देशों के बीच कई परियोजनाओं पर सहयोग जारी है। ऐसे में तीस्ता परियोजना को चीन-बांग्लादेश संबंधों के अगले बड़े चरण के रूप में देखा जा रहा है। यदि इस परियोजना में चीन की भूमिका बढ़ती है तो दक्षिण एशिया में उसका रणनीतिक प्रभाव भी मजबूत हो सकता है, जिसे भारत अपनी सुरक्षा और क्षेत्रीय संतुलन के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण मानता है।

जल बंटवारा समझौते की देरी भी बनी बड़ी वजह

भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के जल बंटवारे को लेकर लंबे समय से बातचीत चल रही है, लेकिन अब तक अंतिम समझौता नहीं हो सका है। विभिन्न स्तरों पर मतभेद और आंतरिक राजनीतिक कारणों के चलते यह मामला वर्षों से लंबित है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसी स्थिति का लाभ उठाकर चीन ने बांग्लादेश के साथ अपने विकास सहयोग को मजबूत करने का अवसर तलाशा है। यदि भारत इस दिशा में तेजी से आगे नहीं बढ़ता, तो भविष्य में ढाका का झुकाव विकास परियोजनाओं के लिए चीन की ओर और अधिक बढ़ सकता है।

आगे क्या हो सकता है?

तीस्ता परियोजना अब केवल नदी प्रबंधन या बाढ़ नियंत्रण तक सीमित विषय नहीं रह गई है। यह दक्षिण एशिया में बदलते रणनीतिक समीकरण, क्षेत्रीय प्रभाव और भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है। चीन इसे अपने दीर्घकालिक क्षेत्रीय सहयोग कार्यक्रम के रूप में देख रहा है, जबकि भारत इसे अपनी सामरिक सुरक्षा और पड़ोसी देशों के साथ संबंधों के नजरिए से परख रहा है। आने वाले समय में इस परियोजना की दिशा केवल बांग्लादेश के विकास को ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के शक्ति संतुलन को भी प्रभावित कर सकती है।

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