विदेशी दवाओं के आयात नियमों में बड़े बदलाव की तैयारी, मरीजों को सस्ती और समय पर दवा मिलने की उम्मीद
केंद्र सरकार ने विदेश से आयात होने वाली दवाओं के नियमों को सरल बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन का मसौदा जारी किया है, जिसके तहत अधिकांश आयातित दवाओं के लिए शेल्फ लाइफ संबंधी शर्तों में ढील देने का प्रस्ताव है। इससे आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बढ़ने, सप्लाई चेन मजबूत होने और मरीजों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
क्या है सरकार का नया प्रस्ताव?
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी ड्राफ्ट के अनुसार, अब भारत में आयात की जाने वाली अधिकांश दवाओं के लिए यह जरूरी होगा कि देश में पहुंचने के समय उनकी एक्सपायरी में कम से कम 12 महीने शेष हों। वर्तमान नियम के तहत दवा की कुल शेल्फ लाइफ का 60 प्रतिशत हिस्सा बचा होना अनिवार्य है। प्रस्तावित बदलाव से आयात प्रक्रिया अधिक व्यावहारिक और सरल बनने की संभावना है।
किन दवाओं पर लागू नहीं होगा नया नियम?
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह प्रस्ताव सभी दवाओं पर लागू नहीं होगा। बायोलॉजिकल दवाओं और रेडियोफार्मास्यूटिकल्स जैसी विशेष श्रेणी की दवाओं के लिए मौजूदा 60 प्रतिशत शेल्फ लाइफ वाला नियम पहले की तरह प्रभावी रहेगा। इन दवाओं की संवेदनशील प्रकृति को देखते हुए इनके लिए अलग मानक बनाए रखे गए हैं।
मरीजों और दवा बाजार को क्या मिलेगा फायदा?
यदि यह संशोधन लागू होता है तो विदेशों से कई महत्वपूर्ण दवाओं का आयात आसान हो जाएगा। अब तक शेल्फ लाइफ की सख्त शर्तों के कारण कई गुणवत्तापूर्ण दवाएं भारत नहीं पहुंच पाती थीं। नए नियम से आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बढ़ सकती है, सप्लाई में आने वाली रुकावटें कम होंगी और दवाओं की बर्बादी भी घटेगी। बेहतर सप्लाई चेन से कंपनियों की लागत कम होने की संभावना है, जिसका लाभ मरीजों को भी मिल सकता है।
आम जनता और उद्योग से मांगे गए सुझाव
सरकार ने इस मसौदे पर दवा उद्योग, विशेषज्ञों और आम नागरिकों से सुझाव एवं आपत्तियां आमंत्रित की हैं। निर्धारित समय सीमा के भीतर प्राप्त सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम नियम अधिसूचित किए जाएंगे। मंत्रालय का कहना है कि इस पहल का उद्देश्य कारोबार को आसान बनाना, दवाओं की उपलब्धता बढ़ाना और स्वास्थ्य सेवाओं को अधिक प्रभावी बनाना है।
सरकार का क्या है उद्देश्य?
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, प्रस्तावित संशोधन से दवा आपूर्ति प्रणाली अधिक मजबूत होगी, आयात प्रक्रिया में अनावश्यक बाधाएं कम होंगी और देश में आवश्यक दवाओं की उपलब्धता बेहतर होगी। साथ ही, मरीजों को पर्याप्त शेल्फ लाइफ वाली गुणवत्तापूर्ण दवाएं मिलती रहेंगी और स्वास्थ्य क्षेत्र में ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को भी बढ़ावा मिलेगा।