अंडमान पहुंचा जापानी युद्धपोत, हिंद-प्रशांत में भारत-जापान की रणनीतिक साझेदारी होगी और मजबूत
भारत और जापान के बीच रक्षा सहयोग लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है। इसी कड़ी में जापानी नौसेना का विध्वंसक युद्धपोत जेएस ताकानामी अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के श्री विजय पुरम पहुंचा। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा केवल सैन्य सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा, रणनीतिक संतुलन और आर्थिक साझेदारी को नई मजबूती देने की दिशा में अहम कदम है।
अंडमान में जापानी युद्धपोत का विशेष दौरा
23 से 25 जून के बीच जापानी नौसेना का विध्वंसक युद्धपोत जेएस ताकानामी श्री विजय पुरम (अंडमान एवं निकोबार) पहुंचा। भारतीय नौसेना के अंडमान एवं निकोबार कमांड के अनुसार, इस यात्रा का उद्देश्य दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता तथा सुरक्षित समुद्री मार्गों के प्रति साझा प्रतिबद्धता को और आगे बढ़ाना है। यह दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते सामरिक विश्वास का भी प्रतीक माना जा रहा है।
रक्षा अधिकारियों के बीच हुई अहम बैठक
दौरे के दौरान जापानी युद्धपोत के कमांडिंग ऑफिसर और जापान के रक्षा अताशे कैप्टन नाकानिशी रयोता ने अंडमान एवं निकोबार कमांड के वरिष्ठ नौसैनिक अधिकारियों से मुलाकात की। इस दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा और भविष्य की संयुक्त गतिविधियों पर चर्चा की। स्मृति-चिह्नों का आदान-प्रदान कर दोनों देशों ने अपनी मजबूत रणनीतिक साझेदारी और दीर्घकालिक सहयोग की भावना को भी प्रदर्शित किया।
सांस्कृतिक रिश्तों को भी मिला सम्मान
सैन्य गतिविधियों के साथ जापानी नौसैनिक प्रतिनिधिमंडल ने गांधी पार्क स्थित ऐतिहासिक जापानी मंदिर पहुंचकर श्रद्धांजलि भी अर्पित की। इस पहल ने दोनों देशों के बीच दशकों पुराने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंधों को सम्मान देने का संदेश दिया। भारत और जापान के रिश्ते केवल रक्षा सहयोग तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक और मानवीय जुड़ाव भी लगातार मजबूत हो रहा है।
विशेषज्ञ बोले- हिंद-प्रशांत में बनेगा मजबूत रणनीतिक संतुलन
भू-राजनीतिक मामलों के विशेषज्ञ ब्रह्मा चेलानी का मानना है कि भारत और जापान स्वाभाविक रणनीतिक साझेदार हैं और दोनों देशों के संबंध दुनिया के सबसे तेजी से मजबूत हो रहे द्विपक्षीय रिश्तों में शामिल हैं। उनके अनुसार, दोनों देश क्षेत्रीय सुरक्षा, आपूर्ति श्रृंखला, समुद्री सहयोग और तकनीकी साझेदारी जैसे क्षेत्रों में मिलकर नई रणनीतिक दिशा तय कर रहे हैं।
शिखर वार्ता में सेमीकंडक्टर से लेकर इंडस्ट्रियल कॉरिडोर तक होगी चर्चा
विशेषज्ञों के मुताबिक जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची के प्रस्तावित भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत हो सकती है। इनमें सेमीकंडक्टर निर्माण, ऑटोमोबाइल उद्योग, क्षेत्रीय कनेक्टिविटी, बंगाल की खाड़ी में औद्योगिक गलियारे का विकास और निवेश बढ़ाने जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। इस दौरे में जापान के उद्योग जगत के प्रतिनिधियों की भागीदारी भी दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति दे सकती है।
हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ेगी भारत-जापान की रणनीतिक ताकत
विशेषज्ञों का मानना है कि जापानी युद्धपोत की अंडमान यात्रा और आगामी भारत-जापान शिखर वार्ता इस बात का स्पष्ट संकेत हैं कि दोनों देश हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता, सुरक्षित समुद्री व्यापार, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक संतुलन को मजबूत करने के लिए दीर्घकालिक साझेदारी को और गहरा कर रहे हैं। यह सहयोग क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।