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इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला: जैसलमेर में महिला रेस्क्यू

जैसलमेर जिले के बड़ा बाग क्षेत्र स्थित भट्टों की ढाणी से एक बेहद गंभीर और अमानवीय मामला सामने आया है, जहां एक महिला को लंबे समय से पैरों में बेड़ियां डालकर बंधक जैसी स्थिति में रखा गया था। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) की त्वरित कार्रवाई के बाद महिला को सुरक्षित मुक्त कराया गया। यह घटना न केवल स्थानीय प्रशासन को सतर्क करने वाली है, बल्कि समाज में मानसिक स्वास्थ्य और मानवाधिकारों को लेकर गंभीर सवाल भी खड़े करती है।

DLSA निरीक्षण में हुआ मामले का खुलासा

जानकारी के अनुसार, डीएलएसए द्वारा किए जा रहे त्रैमासिक निरीक्षण के दौरान एक पैरा लीगल वॉलंटियर (PLV) ने महिला की स्थिति की सूचना दी। सूचना मिलते ही डीएलएसए सचिव एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ललित पुरोहित ने तुरंत टीम को मौके पर भेजा। निरीक्षण के दौरान टीम ने पाया कि महिला को एक अस्थायी झोपड़ी जैसे स्थान में पैरों में बेड़ियां डालकर रखा गया था। स्थिति को गंभीर मानते हुए तत्काल रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया।

रेस्क्यू ऑपरेशन और प्रशासनिक कार्रवाई

मौके पर समाज कल्याण विभाग और 108 एम्बुलेंस सेवा की सहायता से महिला को सुरक्षित बाहर निकाला गया। इसके बाद उसे तुरंत पुनर्वास गृह भेजा गया, जहां उसका इलाज और देखभाल शुरू की गई। महिला ने अपना नाम सुगना बताया और आरोप लगाया कि उसे उसके देवर द्वारा बेड़ियों में बांधकर रखा गया था। प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए पूरी जांच प्रक्रिया शुरू कर दी है।

मानसिक स्थिति और आगे की जांच

प्रारंभिक जांच में महिला मानसिक रूप से अस्वस्थ पाई गई है और लंबे समय से उसे उचित चिकित्सा सुविधा नहीं मिली थी। डीएलएसए सचिव ने उसके मानसिक स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए काउंसलिंग और चिकित्सा उपचार के निर्देश दिए हैं। फिलहाल प्रशासन यह भी जांच कर रहा है कि महिला को इस स्थिति में रखने के पीछे किन लोगों की भूमिका रही और क्या यह मानवाधिकारों का उल्लंघन है।

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