राष्ट्रपति भवन में मोदी-शाह की मुलाकातों से बढ़ी हलचल, मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चाएं तेज
केंद्र की राजनीति में गुरुवार को उस समय हलचल बढ़ गई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। इन लगातार बैठकों ने केंद्रीय मंत्रिपरिषद में संभावित फेरबदल और विस्तार की अटकलों को हवा दे दी है। हाल के दिनों में कुछ मंत्रियों के राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने और पार्टी संगठन में नई जिम्मेदारियां मिलने के घटनाक्रम ने राजनीतिक गलियारों में चर्चाओं का दौर तेज कर दिया है।
राष्ट्रपति भवन में अमित शाह की मुलाकात ने खींचा ध्यान
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने गुरुवार को राष्ट्रपति भवन पहुंचकर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात की। राष्ट्रपति सचिवालय ने सोशल मीडिया पर इस मुलाकात की तस्वीर भी साझा की। हालांकि बैठक के एजेंडे को लेकर कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया मुलाकात के बाद शाह की यह बैठक राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसी वजह से केंद्र सरकार में संभावित बदलावों को लेकर अटकलें और तेज हो गई हैं।
राज्यसभा कार्यकाल खत्म होने से बदले राजनीतिक समीकरण
मंत्रिपरिषद में फेरबदल की चर्चाओं के पीछे हाल के कुछ राजनीतिक घटनाक्रम भी अहम माने जा रहे हैं। भाजपा नेता जॉर्ज कुरियन का राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्होंने केंद्रीय मंत्रिपरिषद से इस्तीफा दे दिया। वे अल्पसंख्यक मामलों के साथ-साथ मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी विभाग में राज्य मंत्री के रूप में जिम्मेदारी निभा रहे थे। पार्टी द्वारा उन्हें दोबारा राज्यसभा के लिए नामित नहीं किए जाने के बाद राजनीतिक हलकों में नए चेहरों को मौका मिलने की संभावनाओं पर चर्चा शुरू हो गई।
रवनीत सिंह समेत कई नेताओं की भूमिका पर नजर
रेल राज्य मंत्री और खाद्य प्रसंस्करण उद्योग राज्य मंत्री रवनीत सिंह का राज्यसभा कार्यकाल भी हाल ही में समाप्त हुआ है। भाजपा ने उन्हें भी दोबारा उच्च सदन के लिए नामित नहीं किया है। ऐसे में उनके भविष्य और मंत्रिमंडल में संभावित बदलावों को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्यसभा सदस्यता समाप्त होने वाले नेताओं की जगह नए प्रतिनिधियों को मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है।
संगठन में नई जिम्मेदारियों से बढ़ीं अटकलें
भाजपा ने पिछले कुछ महीनों में कई केंद्रीय मंत्रियों को संगठनात्मक जिम्मेदारियां भी सौंपी हैं। केंद्रीय राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा को दिल्ली भाजपा अध्यक्ष बनाया गया, जबकि वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी को उत्तर प्रदेश भाजपा की कमान सौंपी गई। पार्टी और सरकार में समानांतर जिम्मेदारियों के इस पुनर्गठन को भी संभावित मंत्रिमंडल विस्तार से जोड़कर देखा जा रहा है। इससे यह संकेत मिल रहा है कि भाजपा आगामी राजनीतिक चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर बदलाव की रणनीति बना सकती है।
क्या जल्द हो सकता है मंत्रिमंडल विस्तार?
हालांकि सरकार या भाजपा की ओर से मंत्रिमंडल फेरबदल को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है, लेकिन राष्ट्रपति से प्रधानमंत्री और गृह मंत्री की मुलाकातों ने राजनीतिक चर्चाओं को नई गति दे दी है। राज्यसभा कार्यकाल समाप्त होने, मंत्रियों की नई संगठनात्मक नियुक्तियों और बदलते राजनीतिक समीकरणों को देखते हुए आने वाले दिनों में केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल में कुछ बदलाव देखने को मिल सकते हैं। फिलहाल सभी की नजरें भाजपा नेतृत्व और राष्ट्रपति भवन से आने वाले अगले संकेतों पर टिकी हैं।