अलवर जिला अस्पताल में देर रात हंगामा, गार्ड और मरीजों के परिजनों के बीच हुई तीखी बहस
वार्ड से बाहर निकालने को लेकर बढ़ा विवाद, डॉक्टर की समझाइश से शांत हुआ मामला
अलवर के राजीव गांधी सामान्य अस्पताल में देर रात उस समय हंगामे की स्थिति बन गई जब अस्पताल के सुरक्षा गार्डों और मरीजों के परिजनों के बीच तीखी नोकझोंक हो गई। परिजनों ने आरोप लगाया कि उन्हें वार्ड से जबरन बाहर निकाला गया, जबकि सुरक्षा कर्मियों का कहना था कि अस्पताल के नियमों का पालन कराया जा रहा था। विवाद बढ़ने पर अस्पताल परिसर में काफी देर तक तनावपूर्ण माहौल बना रहा। सूचना मिलने के बाद ड्यूटी डॉक्टर मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को समझाकर मामला शांत कराया।
वार्ड में मरीज के पास बैठे परिजनों को बाहर निकालने पर हुआ विवाद
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना उस समय हुई जब सुरक्षा गार्ड अस्पताल के वार्डों में मौजूद मरीजों के अटेंडरों को बाहर जाने के लिए कह रहे थे। इसी दौरान कुछ परिजनों और गार्डों के बीच बहस शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और अस्पताल परिसर में हंगामे जैसी स्थिति बन गई। मौके पर मौजूद लोगों का कहना है कि दोनों पक्षों के बीच काफी देर तक कहासुनी होती रही। अस्पताल में भर्ती मरीजों और उनके परिजनों के बीच भी इस घटना को लेकर चर्चा का माहौल रहा।
परिजनों ने गार्डों पर दुर्व्यवहार के लगाए आरोप
कठूमर क्षेत्र के जाड़ला निवासी सोनू ने आरोप लगाया कि उनकी मां पिछले तीन दिनों से अस्पताल में भर्ती हैं और वह उनकी देखभाल के लिए वार्ड में मौजूद थे। इसी दौरान सुरक्षा कर्मी वहां पहुंचे और अटेंडरों को बाहर जाने के लिए कहा। सोनू का आरोप है कि बहस के दौरान एक गार्ड ने उनका कॉलर पकड़कर उन्हें वार्ड से बाहर निकाल दिया, जिससे विवाद और बढ़ गया। वहीं अस्पताल प्रशासन की ओर से इस मामले पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना बाकी है।
दूसरे मरीज के परिजन ने भी लगाए धक्का देने के आरोप
अजरका निवासी सतेंद्र कुमार ने भी सुरक्षा कर्मियों के व्यवहार पर सवाल उठाए। उनका कहना है कि उनकी पत्नी ब्रेन हेमरेज के बाद अस्पताल में भर्ती हैं और उस समय उन्हें दवा की बोतल चढ़ाई जा रही थी। सतेंद्र के अनुसार, वह अपनी पत्नी के पास बैठे हुए थे, तभी सुरक्षा गार्ड पहुंचे और उन्हें वार्ड से बाहर जाने के लिए कहा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस दौरान उनके साथ धक्का-मुक्की की गई। इन आरोपों के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
हंगामे के दौरान नाइट सुपरवाइजर की भूमिका पर उठे सवाल
घटना के दौरान अस्पताल के नाइट सुपरवाइजर की मौजूदगी को लेकर भी सवाल उठे। प्रत्यक्षदर्शियों का दावा है कि हंगामे के समय नाइट सुपरवाइजर अपने कक्ष में थे और विवाद की जानकारी मिलने के बाद उन्हें बुलाया गया। हालांकि इस संबंध में अस्पताल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। घटना के बाद अस्पताल के कर्मचारियों और अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर भी चर्चा शुरू हो गई है।
ड्यूटी डॉक्टर ने संभाला मोर्चा, शांत हुआ माहौल
विवाद बढ़ने की सूचना मिलने के बाद ड्यूटी डॉक्टर मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों से बातचीत कर स्थिति को नियंत्रित किया। डॉक्टर ने मरीजों के परिजनों और सुरक्षा कर्मियों को अस्पताल के नियमों की जानकारी देते हुए शांति बनाए रखने की अपील की। इसके बाद मामला शांत हो गया और अस्पताल की व्यवस्था सामान्य हो सकी। फिलहाल इस पूरे घटनाक्रम को लेकर अस्पताल प्रशासन की ओर से विस्तृत रिपोर्ट तैयार किए जाने की संभावना जताई जा रही है।