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उज्जैन में SIR फॉर्म की फोटो का दुरुपयोग, नाबालिग छात्रा से जुड़ा मामला; महिला BLO समेत 4 गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के उज्जैन जिले में SIR फॉर्म में लगी नाबालिग छात्रा की फोटो का दुरुपयोग कर आपत्तिजनक सामग्री बनाने और सोशल मीडिया पर वायरल करने का गंभीर मामला सामने आया है। पंवासा थाना क्षेत्र की इस घटना में पुलिस ने महिला बीएलओ समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जबकि एक आरोपी फरार बताया जा रहा है। पुलिस जांच में खुलासा हुआ है कि फॉर्म में जमा फोटो को निकालकर एडिट किया गया और गलत तरीके से वायरल किया गया, जिससे छात्रा और उसके परिवार की छवि को नुकसान पहुंचा।

SIR फॉर्म की फोटो से शुरू हुआ दुरुपयोग का मामला

पुलिस जांच के अनुसार, नाबालिग छात्रा ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) फॉर्म में अपनी पासपोर्ट साइज फोटो जमा की थी। आरोप है कि इसी फोटो को महिला बीएलओ ने नियमों के खिलाफ जाकर अपने सहयोगियों को भेज दिया। इसके बाद यह फोटो कई लोगों तक पहुंची और गलत मंशा से इसका इस्तेमाल किया गया। यह मामला सरकारी रिकॉर्ड में जमा व्यक्तिगत डेटा की सुरक्षा और गोपनीयता पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।

फोटो एडिट कर आपत्तिजनक वीडियो बनाकर किया वायरल

जांच में सामने आया कि आरोपियों ने किसी अन्य वीडियो से स्क्रीनशॉट लेकर उसमें छात्रा की फोटो को एडिट कर जोड़ दिया। इसके बाद तैयार किए गए आपत्तिजनक वीडियो को सोशल मीडिया और व्हाट्सएप ग्रुपों में वायरल किया गया। शिकायत के बाद जब पुलिस ने तकनीकी जांच की, तो पता चला कि वायरल सामग्री पूरी तरह फर्जी और एडिटेड थी, जिसका उद्देश्य छात्रा और उसके परिवार की छवि खराब करना था।

महिला बीएलओ समेत चार आरोपी गिरफ्तार, एक फरार

पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए महिला बीएलओ फखरुनिशा उर्फ बेबी, एहसान पटेल, आबिद पटेल और मुजफ्फर पटेल को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि फोटो को सबसे पहले साझा करने और आगे एडिटिंग में मुख्य भूमिका इन्हीं लोगों की रही। वहीं एक अन्य आरोपी यूसुफ पटेल फरार बताया जा रहा है, जिसकी तलाश में पुलिस दबिश दे रही है। पुलिस ने आरोपियों के मोबाइल फोन और संबंधित दस्तावेज जब्त कर लिए हैं।

साजिश और डेटा सुरक्षा पर उठे गंभीर सवाल

पुलिस का मानना है कि यह घटना सिर्फ फोटो दुरुपयोग का मामला नहीं, बल्कि एक सुनियोजित साजिश भी हो सकती है, क्योंकि सभी आरोपी और पीड़िता एक ही गांव के रहने वाले हैं। इस घटना ने सरकारी फॉर्म और दस्तावेजों में जमा व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब यह भी जांच कर रहा है कि संवेदनशील डेटा बाहर कैसे लीक हुआ और इसमें लापरवाही कहां हुई।

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