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क्रिकेटर से कुख्यात अपराधी तक: मुजफ्फरनगर मुठभेड़ में मारे गए सतपाल की कहानी ने चौंकाया

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में पुलिस मुठभेड़ में 25 हजार रुपये के इनामी बदमाश सतपाल उर्फ सत्तू की मौत के बाद उसके जीवन से जुड़े कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। कभी क्रिकेट मैदान पर पहचान बनाने वाला और नगर निगम का पार्षद रह चुका सतपाल बाद में अपराध की दुनिया में उतर गया। पुलिस के अनुसार उसके खिलाफ अपहरण, दुष्कर्म, हत्या, रंगदारी और अन्य गंभीर मामलों में कई मुकदमे दर्ज थे।

किशोरी अपहरण मामले में पुलिस को थी तलाश

मुजफ्फरनगर पुलिस के अनुसार सतपाल उर्फ सत्तू एक किशोरी के अपहरण और दुष्कर्म के मामले में वांछित था। 19 जून को तितावी क्षेत्र में हुई अपहरण की घटना के बाद उसकी तलाश तेज कर दी गई थी। सिविल लाइन थाना पुलिस और एसओजी की संयुक्त टीम ने बामनहेड़ी रेलवे स्टेशन के पास उसे घेर लिया। मुठभेड़ के दौरान वह घायल हुआ और बाद में उसकी मृत्यु हो गई। पुलिस का कहना है कि आरोपी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित था और वह लंबे समय से फरार चल रहा था।

नौकरी का झांसा देकर बनाता था शिकार

जांच एजेंसियों के अनुसार सतपाल खुद को पूर्व सैनिक या प्रभावशाली व्यक्ति बताकर लोगों का विश्वास जीतता था। वह नौकरी दिलाने का भरोसा देकर परिवारों से संपर्क करता और फिर उनकी बेटियों या किशोरियों को अपने जाल में फंसाने का प्रयास करता था। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में इसी प्रकार के मामले दर्ज थे। अधिकारियों का कहना है कि आरोपी सार्वजनिक स्थानों पर लोगों से संपर्क बनाकर उन्हें धोखे में लेने की रणनीति अपनाता था।

क्रिकेट मैदान से अपराध जगत तक का सफर

सतपाल का शुरुआती जीवन खेलों से जुड़ा रहा। वह क्रिकेट में सक्रिय था और विभिन्न प्रतियोगिताओं में भाग ले चुका था। जानकारी के अनुसार उसने घरेलू स्तर पर क्रिकेट खेला और कई टूर्नामेंटों में अपनी पहचान बनाई थी। खेल जगत में सक्रिय रहने के बावजूद बाद के वर्षों में उसका नाम आपराधिक गतिविधियों से जुड़ता चला गया। यही कारण है कि उसका जीवन खेल और अपराध के बीच एक असामान्य विरोधाभास के रूप में देखा जा रहा है।

पार्षद बनने के बाद बढ़ता गया आपराधिक रिकॉर्ड

साल 2007 में सतपाल चंडीगढ़ नगर निगम का पार्षद भी चुना गया था। हालांकि इसके बाद उसका नाम लगातार विभिन्न आपराधिक मामलों में सामने आने लगा। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उस पर लूट, हत्या, रंगदारी और अन्य गंभीर अपराधों के आरोप लगे। जेल में रहने के दौरान भी वह चर्चाओं में बना रहा। अधिकारियों का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में उसके खिलाफ कई राज्यों में आपराधिक मामले दर्ज हुए, जिसके चलते वह कानून प्रवर्तन एजेंसियों की निगरानी में था।

फरारी के बाद बढ़ी थीं पुलिस की चुनौतियां

बताया जाता है कि वर्ष 2026 में पुलिस हिरासत से फरार होने के बाद सतपाल की तलाश और तेज कर दी गई थी। उसके खिलाफ विभिन्न राज्यों में कार्रवाई चल रही थी। पुलिस का दावा है कि फरारी के दौरान उसने कई आपराधिक घटनाओं को अंजाम दिया और लगातार ठिकाने बदलता रहा। आखिरकार मुजफ्फरनगर में हुई मुठभेड़ के बाद उसकी आपराधिक गतिविधियों का अंत हो गया। पुलिस अब उससे जुड़े नेटवर्क और अन्य मामलों की भी जांच कर रही है।

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