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पंजाब बॉर्डर पर ड्रोन से तस्करी का बड़ा खुलासा, हथियार–नशा नेटवर्क में ISI कनेक्शन का दावा


भारत–पाकिस्तान सीमा से सटे पंजाब में ड्रोन के जरिए हथियार, गोला-बारूद और नशीले पदार्थों की तस्करी का बड़ा नेटवर्क सामने आया है। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार पिछले कुछ महीनों में करीब 400 ड्रोन जब्त किए गए हैं। जांच में इस पूरे नेटवर्क में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI और स्थानीय गैंगस्टरों के गठजोड़ की आशंका जताई जा रही है।

सीमा पार से हाईटेक ड्रोन तस्करी का नया पैटर्न

पंजाब में भारत–पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा एजेंसियों ने एक बड़े और हाईटेक तस्करी नेटवर्क का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान की ओर से ड्रोन के जरिए नशीले पदार्थ, हथियार और गोला-बारूद भारतीय सीमा में भेजे जा रहे हैं। इन ड्रोन को सैटेलाइट तकनीक से जोड़ा गया है, जिससे तस्करों को रियल टाइम कंट्रोल और बेहतर नेविगेशन की सुविधा मिलती है। यह पूरा नेटवर्क पारंपरिक तस्करी से आगे बढ़कर अब तकनीक आधारित अपराध का रूप ले चुका है।

400 ड्रोन जब्त, बढ़ी सुरक्षा एजेंसियों की चुनौती

सुरक्षा एजेंसियों ने पिछले छह महीनों में करीब 400 ड्रोन जब्त किए हैं, जो सीमा पार से भेजे जा रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि कई ड्रोन को मार गिराया गया या ट्रैक कर रोका गया, लेकिन इसके बावजूद तस्करी की कोशिशों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। विशेषज्ञों के अनुसार यह दर्शाता है कि तस्कर अब अधिक उन्नत तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं और लगातार नए तरीके अपना रहे हैं।

हथियार और नशे की सप्लाई में बढ़ा खतरा

जांच एजेंसियों का कहना है कि यह नेटवर्क केवल नशीले पदार्थों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पिस्तौल, असॉल्ट राइफलों और अन्य हथियारों की सप्लाई भी शामिल है। पंजाब में सीमावर्ती इलाकों में ड्रोन के जरिए गिराई जा रही खेपों की संख्या में वृद्धि हुई है। इससे सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ गई है क्योंकि यह सीधे तौर पर आंतरिक सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा माना जा रहा है।

सैटेलाइट कनेक्टेड ड्रोन से बढ़ी घुसपैठ की क्षमता

नए तकनीकी ड्रोन सैटेलाइट से जुड़े होने के कारण सीमा पार से गहराई तक भारतीय क्षेत्र में घुसपैठ करने में सक्षम बताए जा रहे हैं। इन ड्रोन में लाइव वीडियो फीडिंग की क्षमता भी है, जिससे तस्कर भारतीय सुरक्षा बलों की गतिविधियों पर नजर रख सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक पारंपरिक निगरानी सिस्टम को चुनौती दे रही है और सुरक्षा एजेंसियों के लिए नई समस्या खड़ी कर रही है।

ISI और स्थानीय नेटवर्क के गठजोड़ का दावा

खुफिया एजेंसियों के अनुसार इस पूरे नेटवर्क में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI की भूमिका होने की आशंका जताई जा रही है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्थानीय गैंगस्टर और कुछ समर्थक समूह इस नेटवर्क का हिस्सा हो सकते हैं। इस नेटवर्क के जरिए सीमा पार से भारत में नशा और हथियार भेजकर अस्थिरता फैलाने की कोशिश की जा रही है।

कम और हाईटेक ड्रोन का मिला-जुला इस्तेमाल

अधिकारियों के मुताबिक इस तस्करी नेटवर्क में हाईटेक ड्रोन के साथ-साथ कम तकनीक वाले ड्रोन का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। छोटे ड्रोन ध्यान भटकाने के लिए इस्तेमाल होते हैं, जबकि बड़े ड्रोन मुख्य खेप गिराने के लिए भेजे जाते हैं। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि जब तक इस नेटवर्क के ऑपरेटरों और सपोर्ट सिस्टम को खत्म नहीं किया जाता, तब तक तस्करी की यह प्रक्रिया पूरी तरह रुकना मुश्किल है।

सीमा सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी चुनौती

यह पूरा मामला अब सीमा सुरक्षा बल (BSF) और अन्य सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि इस तरह की तकनीकी तस्करी को रोकने के लिए उन्नत एंटी-ड्रोन सिस्टम और इंटेलिजेंस नेटवर्क को और मजबूत करना होगा। फिलहाल पूरे नेटवर्क की गहन जांच जारी है और कई महत्वपूर्ण सुराग एजेंसियों के हाथ लगे हैं।

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