#राज्य-शहर #हेल्थ न्यूज़

मां का साया छिना, ब्लड कैंसर से जूझ रहा 15 वर्षीय साजिद, फिर भी आंखों में जिंदा है शिक्षक बनने का सपना


श्रीगंगानगर के मिर्जावाला गांव का 15 वर्षीय साजिद ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी से लड़ रहा है। मां की मौत और आर्थिक तंगी के बावजूद उसका हौसला टूटा नहीं है। पढ़ाई छोड़कर अस्पताल के चक्कर काट रहे साजिद का सपना है कि वह ठीक होकर फिर से स्कूल जाए और शिक्षक बने।

दर्द और संघर्ष के बीच भी जिंदा है उम्मीद

श्रीगंगानगर जिले के मिर्जावाला गांव का 15 वर्षीय साजिद आज जिंदगी की सबसे कठिन लड़ाई लड़ रहा है। पहले मां का साया छिन गया और अब ब्लड कैंसर जैसी गंभीर बीमारी ने उसके बचपन को चुनौती दे दी है। बावजूद इसके साजिद का हौसला कमजोर नहीं पड़ा है। बीमारी के कारण स्कूल जाना छूट गया है, लेकिन उसकी आंखों में पढ़ाई जारी रखने और शिक्षक बनने का सपना अब भी जिंदा है। अस्पताल और दवाइयों के बीच भी वह किताबों की दुनिया को नहीं भूल पाया है।

स्कूल की जगह अस्पताल बना रोजमर्रा की जिंदगी

साजिद पिछले कई महीनों से बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में इलाज करा रहा है। कभी जो हाथ किताबें पकड़ते थे, आज वही हाथ दवाइयों और रिपोर्टों की फाइलें थामे हुए हैं। जनवरी में लगातार बुखार आने के बाद जांच में ब्लड कैंसर की पुष्टि हुई, जिसके बाद उसकी जिंदगी पूरी तरह बदल गई। इलाज के दौरान उसे कई तरह की दवाएं और नियमित जांच की जरूरत पड़ती है, जिससे उसका समय अस्पतालों में ही बीत रहा है।

आर्थिक तंगी से जूझता परिवार

साजिद का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर स्थिति में है। पिता जाकिर हुसैन दिहाड़ी मजदूरी करते हैं और स्वयं भी गंभीर बीमारी से जूझ रहे हैं। मां का निधन कोरोना काल में हो चुका है, जिससे परिवार पर जिम्मेदारियों का बोझ और बढ़ गया है। इलाज पर हर महीने लगभग 40 हजार रुपये का खर्च आ रहा है, जबकि अब तक कुल खर्च लाखों में पहुंच चुका है। सीमित आय के चलते परिवार के लिए इलाज जारी रखना भी एक बड़ी चुनौती बन गया है।

इलाज और उम्मीद के बीच संघर्ष

आयुष्मान कार्ड के तहत अस्पताल में कुछ सुविधाएं निःशुल्क मिल रही हैं, लेकिन बाहर की दवाएं, जांच और यात्रा का खर्च परिवार की क्षमता से बाहर है। साजिद के फूफा और बुआ उसकी देखभाल कर रहे हैं, ताकि इलाज में कोई रुकावट न आए। परिवार की सबसे बड़ी चिंता यह है कि कहीं आर्थिक संकट के कारण इलाज बीच में न रुक जाए, क्योंकि बीमारी का इलाज लंबा और महंगा है।

टूटते हालात में भी नहीं टूटा सपना

साजिद की सबसे बड़ी ताकत उसका सपना है। जब भी उससे पूछा जाता है कि वह आगे क्या करना चाहता है, तो वह सिर्फ इतना कहता है कि ठीक होकर फिर से स्कूल जाना है और पढ़-लिखकर शिक्षक बनना है। उसका यह सपना ही उसे कठिन परिस्थितियों में भी उम्मीद देता है। परिवार और समाज की मदद से ही उसके इलाज को आगे बढ़ाया जा सकता है और उसका भविष्य बचाया जा सकता है।

मदद की आस में परिवार

परिवार ने समाज और भामाशाहों से मदद की अपील की है ताकि साजिद का इलाज बिना रुके जारी रह सके। आर्थिक सहायता मिलने पर न केवल उसका इलाज संभव होगा, बल्कि उसके पढ़ाई के सपने को भी नई उड़ान मिल सकेगी। यह कहानी केवल बीमारी की नहीं, बल्कि हिम्मत और उम्मीद की भी मिसाल बन गई है।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *