श्रीगंगानगर में नकली दवा रैकेट का खुलासा, फार्मा डीलर बनकर नशे की तस्करी और ब्रांड कॉपी करने का आरोप
श्रीगंगानगर में नकली दवाओं और नशीली गोलियों के बड़े नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपी अश्विनी शर्मा पर फार्मा कंपनी के नाम का दुरुपयोग कर नकली दवाएं बनाने, नशे की तस्करी और अवैध बिक्री का गंभीर आरोप है। इस मामले में पहले से चल रही जांच के बीच एक और एफआईआर दर्ज की गई है।
पहले से दर्ज केस के बाद बढ़ा पुलिस का शिकंजा
श्रीगंगानगर शहर सदर थाना पुलिस पहले से ही 4.68 लाख नशीली गोलियों और कैप्सूल की बरामदगी के मामले में आरोपी अश्विनी शर्मा की तलाश कर रही थी। इसी बीच सोमवार को उसके खिलाफ एक और नया मामला दर्ज किया गया है, जिससे पूरे नेटवर्क की जांच और तेज हो गई है। पुलिस का कहना है कि यह मामला केवल नशे की तस्करी तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें नकली दवा निर्माण और ब्रांड फ्रॉड की भी आशंका है।
फार्मा कंपनी ने लगाया गंभीर आरोप
हिमाचल प्रदेश की विनमैक्स हेल्थकेयर फर्म के संचालक शशिभूषण काजल ने आरोप लगाया है कि उनके ब्रांड नाम और कंपनी की पहचान का गलत इस्तेमाल कर नकली और नशीली दवाओं का निर्माण और विक्रय किया गया। शिकायत में श्रीगंगानगर निवासी अश्विनी शर्मा, जेएमडी ट्रेडर्स के प्रोपराइटर इकबाल सिंह और अन्य लोगों पर दवा कारोबार के आड़ में अवैध गतिविधियां चलाने का आरोप लगाया गया है। मामला सामने आने के बाद ड्रग्स विभाग ने भी जांच शुरू कर दी है।
पुराने संपर्क से शुरू हुआ संदिग्ध कारोबार
रिपोर्ट के अनुसार, शशिभूषण काजल ने बताया कि वर्ष 2017-18 से उनका संपर्क अश्विनी शर्मा से था, लेकिन बाद में नकली दवाओं से जुड़े मामलों के कारण उन्होंने संबंध समाप्त कर दिए थे। हालांकि वर्ष 2025 में आरोपी ने फिर से संपर्क कर जेएमडी ट्रेडर्स के नाम से दवा कारोबार शुरू किया और भारी मात्रा में टैबलेट व कैप्सूल की आपूर्ति ली। इस दौरान करीब एक करोड़ रुपये का व्यापार हुआ, जिसमें कुछ भुगतान लंबित बताया जा रहा है।
ब्रांड कॉपी कर नकली दवाओं का निर्माण
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि अश्विनी शर्मा ने विनमैक्स हेल्थकेयर के नाम और पैकेजिंग की नकल कर नकली दवाइयों का निर्माण शुरू कर दिया। इन दवाओं को बाजार में असली ब्रांड के नाम पर बेचा गया, जिससे न केवल कंपनी की साख को नुकसान पहुंचा बल्कि आम लोगों के स्वास्थ्य के साथ भी बड़ा जोखिम पैदा हुआ। ड्रग्स विभाग ने शिकायत के आधार पर सैंपल जांच और निरीक्षण की कार्रवाई शुरू कर दी है।
ड्रग्स विभाग और पुलिस की संयुक्त जांच जारी
इस पूरे मामले में औषधि नियंत्रण विभाग, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़ और सिरसा को भी शिकायत भेजी गई है। विभागीय जांच में कई संदिग्ध बैच और सप्लाई चैन की पुष्टि हुई है। पुलिस ने जांच निरीक्षक सुभाष चंद्र को सौंपी है और पूरे नेटवर्क की कड़ियों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। अधिकारियों का कहना है कि यह एक संगठित रैकेट हो सकता है, जिसमें नशे की तस्करी और नकली दवा निर्माण दोनों शामिल हैं।
आम जनता के लिए बड़ा खतरा, जांच तेज
पुलिस और ड्रग्स विभाग का मानना है कि इस तरह की गतिविधियां सीधे तौर पर जनता के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा हैं। नकली दवाओं के बाजार में पहुंचने से इलाज की गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है। फिलहाल पुलिस आरोपी की गिरफ्तारी और पूरे नेटवर्क की पहचान के लिए लगातार दबिश दे रही है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।