भारतीय टैरिफ पर ट्रंप ने अपनी ही एजेंसी के आंकड़ों पर उठाए सवाल, नई किताब में दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से जुड़ी एक नई किताब में दावा किया गया है कि उन्होंने भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों पर लगाए जाने वाले टैरिफ को लेकर अपनी ही सरकार के आधिकारिक आंकड़ों पर सवाल उठाए थे। यह खुलासा ऐसे समय सामने आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया जारी है।
नई किताब में सामने आया व्हाइट हाउस की बातचीत का दावा
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कार्यकाल से जुड़ी नई किताब ‘Regime Change’ में दावा किया गया है कि मार्च में हुई एक बैठक के दौरान उन्होंने भारत के टैरिफ से संबंधित आधिकारिक आंकड़ों को खारिज कर दिया था। किताब के लेखकों मैगी हैबरमैन और जोनाथन स्वान के अनुसार, व्यापारिक बाधाओं और पारस्परिकता पर चर्चा के दौरान ट्रंप ने कहा था कि भारतीय टैरिफ वास्तविकता में प्रकाशित आंकड़ों से कहीं अधिक हैं।
कॉमर्स सेक्रेटरी के तर्क से भी नहीं हुए सहमत
किताब के मुताबिक, अमेरिकी वाणिज्य सचिव हॉवर्ड लुटनिक ने ट्रंप को बताया था कि संबंधित आंकड़े अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि कार्यालय (USTR) द्वारा जारी किए गए आधिकारिक आंकड़े हैं। इसके बावजूद ट्रंप ने इन आंकड़ों पर असहमति जताई और दावा किया कि भारत अमेरिकी उत्पादों पर कहीं अधिक शुल्क वसूलता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ट्रंप ने भारत पर 175 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का दावा किया था।
ट्रेड रेसिप्रोसिटी पर ट्रंप का रहा है विशेष जोर
डोनाल्ड ट्रंप लंबे समय से व्यापार में समानता और पारस्परिकता की वकालत करते रहे हैं। राष्ट्रपति बनने के बाद उन्होंने कई देशों के साथ व्यापार घाटे और टैरिफ संरचना को लेकर सख्त रुख अपनाया था। भारत और चीन जैसे देशों के साथ व्यापारिक नीतियों को लेकर उनकी टिप्पणियां कई बार चर्चा का विषय बनीं। विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप का यह दृष्टिकोण अमेरिकी उद्योगों की प्रतिस्पर्धा बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा रहा है।
भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के बीच आया खुलासा
यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीर के बीच हाल ही में नई दिल्ली में अहम बैठक हुई, जिसमें पहले चरण के समझौते से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा की गई। दोनों देश अंतरिम व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप देने की दिशा में काम कर रहे हैं।
आर्थिक संबंधों पर बनी हुई है दुनिया की नजर
भारत और अमेरिका के बीच बढ़ता व्यापार और निवेश दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। ऐसे में व्यापारिक नीतियों और टैरिफ को लेकर सामने आने वाले बयान वैश्विक बाजारों और निवेशकों की नजर में अहम बने रहते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि चल रही वार्ताओं के सफल होने से दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को नई गति मिल सकती है।