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सैन्य शक्तियां सीमित होने पर भड़के ट्रंप, सीनेटरों पर साधा निशाना

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई से जुड़ी अपनी शक्तियों को सीमित करने वाले प्रस्ताव पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। अमेरिकी सीनेट में पारित इस प्रस्ताव के बाद ट्रंप ने कुछ रिपब्लिकन सीनेटरों पर भी निशाना साधते हुए कहा कि ऐसे कदम अमेरिका के विरोधियों को गलत संदेश देते हैं।

सीनेट में पारित हुआ वॉर पावर्स प्रस्ताव

अमेरिकी सीनेट ने राष्ट्रपति की सैन्य कार्रवाई संबंधी शक्तियों को सीमित करने के उद्देश्य से वॉर पावर्स प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। मतदान के दौरान यह प्रस्ताव 50-48 के अंतर से पारित हुआ। इस दौरान चार रिपब्लिकन सीनेटरों ने अपनी पार्टी से अलग जाकर प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया। इस घटनाक्रम को अमेरिकी राजनीति में महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे राष्ट्रपति की विदेश और रक्षा नीति से जुड़े अधिकारों पर बहस तेज हो गई है।

ट्रंप ने सोशल मीडिया पर जताई नाराजगी

प्रस्ताव पारित होने के बाद राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इस तरह के कदम अमेरिका के विरोधियों को गलत संदेश भेजते हैं और इससे उनके प्रशासन के प्रयासों पर असर पड़ सकता है। ट्रंप ने उन रिपब्लिकन सीनेटरों की भी आलोचना की जिन्होंने प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया। उनका कहना था कि इस फैसले से उनके लिए विदेश नीति से जुड़े मुद्दों पर काम करना और अधिक कठिन हो गया है।

व्हाइट हाउस ने दी अपनी सफाई

व्हाइट हाउस की ओर से कहा गया कि मौजूदा स्थिति में अमेरिकी सेना किसी सक्रिय युद्ध अभियान का हिस्सा नहीं है, इसलिए सेना की वापसी जैसे सवाल व्यावहारिक रूप से लागू नहीं होते। प्रशासन का कहना है कि पहले हुए संघर्षविराम के बाद सैन्य गतिविधियों की स्थिति बदल चुकी है और इस प्रस्ताव का तत्काल प्रभाव सीमित रहेगा।

राष्ट्रपति के हस्ताक्षर की नहीं होगी आवश्यकता

यह प्रस्ताव पहले ही अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में भी पारित हो चुका है। हालांकि इसे समवर्ती प्रस्ताव की श्रेणी में रखा गया है, इसलिए इसके लागू होने के लिए राष्ट्रपति के हस्ताक्षर आवश्यक नहीं होंगे। इसके बावजूद इस मुद्दे ने अमेरिका में कार्यपालिका और कांग्रेस के बीच शक्तियों के संतुलन को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।

विदेश नीति पर बढ़ सकती है राजनीतिक बहस

विशेषज्ञों का मानना है कि सैन्य कार्रवाई से जुड़े अधिकारों को लेकर अमेरिका में लंबे समय से चर्चा होती रही है। सीनेट के इस फैसले के बाद आने वाले समय में कांग्रेस और व्हाइट हाउस के बीच अधिकारों की सीमाओं को लेकर राजनीतिक मतभेद और अधिक स्पष्ट हो सकते हैं। इससे अमेरिकी विदेश नीति और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े फैसलों पर भी व्यापक चर्चा की संभावना बढ़ गई है।

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