होर्मुज संकट के बीच भारत को राहत, चार महीने बाद LPG लेकर रवाना हुए दो टैंकर
होर्मुज जलडमरूमध्य में महीनों तक फंसे एलपीजी से लदे दो टैंकर आखिरकार भारत के लिए रवाना हो गए हैं। करीब 22 हजार मीट्रिक टन रसोई गैस लेकर आ रहे इन जहाजों के पहुंचने से घरेलू बाजार में एलपीजी की उपलब्धता बढ़ने और सप्लाई को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
चार महीने की प्रतीक्षा के बाद भारत के लिए निकले गैस टैंकर
खाड़ी क्षेत्र में लंबे समय से जारी तनाव के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य में फंसे एलपीजी से लदे दो जहाज आखिरकार सुरक्षित बाहर निकलने में सफल रहे हैं। भारत के लिए रवाना हुए इन दोनों टैंकरों में करीब 22 हजार मीट्रिक टन रसोई गैस भरी हुई है। क्षेत्र में कुछ समय के लिए हालात सामान्य होने का लाभ उठाकर जहाजों ने अपना सफर शुरू किया। अनुमान है कि ये टैंकर एक सप्ताह के भीतर भारतीय बंदरगाहों तक पहुंच जाएंगे। इससे देश में एलपीजी आपूर्ति को मजबूती मिलेगी और बाजार में संभावित दबाव कम होगा।
कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम के लिए बड़ी राहत साबित हुई यह सफलता
नागपुर स्थित निजी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी कॉन्फिडेंस पेट्रोलियम द्वारा चार्टर किए गए ये जहाज पिछले कई महीनों से फंसे हुए थे। कंपनी के लिए यह स्थिति चुनौतीपूर्ण बन गई थी क्योंकि उसे घरेलू मांग पूरी करने के लिए बड़े पैमाने पर एलपीजी की आवश्यकता थी। टैंकरों के सुरक्षित निकलने से कंपनी को बड़ी राहत मिली है। इसके अलावा अल्जीरिया से 22 हजार मीट्रिक टन एलपीजी लेकर आ रहा एक अन्य जहाज भी भारतीय समुद्री सीमा में पहुंच चुका है, जिससे आने वाले दिनों में सप्लाई और मजबूत होने की संभावना बढ़ गई है।
सीमित अवसर का कप्तानों ने उठाया पूरा फायदा
कंपनी प्रबंधन के अनुसार अमेरिका और ईरान के बीच बने अस्थायी सहमति माहौल के कारण समुद्री मार्ग कुछ समय के लिए खुला था। इसी मौके का लाभ उठाते हुए जहाजों के कप्तानों ने तेजी से निर्णय लिया और टैंकरों को सुरक्षित मार्ग से बाहर निकालने में सफलता हासिल की। कंपनी का कहना है कि यह कदम समय रहते उठाया गया, क्योंकि इसके कुछ समय बाद होर्मुज मार्ग पर फिर से प्रतिबंधात्मक स्थिति बन गई। इस फैसले ने संभावित आपूर्ति संकट को काफी हद तक टालने में मदद की।
सप्लाई संकट से निपटने के लिए कंपनी ने अपनाई वैकल्पिक रणनीति
युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के कारण एलपीजी आपूर्ति प्रभावित होने लगी थी, जिसके बाद कंपनी ने वैकल्पिक इंतजाम किए। चीन की ओर जा रहे दो जहाजों को अतिरिक्त भुगतान कर भारत की दिशा में मोड़ा गया, जिनमें लगभग 50 हजार मीट्रिक टन एलपीजी मौजूद थी। इसके साथ ही कंपनी ने अंतरराष्ट्रीय बाजार से स्पॉट खरीद के जरिए अमेरिका से भी गैस मंगाने की व्यवस्था की। इन कदमों की बदौलत घरेलू बाजार में सप्लाई को बनाए रखने में मदद मिली और संभावित कमी की स्थिति नहीं बनने दी गई।
बढ़ी उपलब्धता से कीमतों पर पड़ सकता है सकारात्मक असर
विशेषज्ञों का मानना है कि नए एलपीजी शिपमेंट भारत पहुंचने के बाद घरेलू बाजार में उपलब्धता बढ़ेगी। इससे खासतौर पर कमर्शियल सेक्टर के लिए गैस आपूर्ति में सुधार देखने को मिल सकता है। पर्याप्त स्टॉक रहने से कीमतों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अंतिम फैसला अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थितियों और आयात लागत पर निर्भर करेगा। फिलहाल घरेलू उपभोक्ताओं के लिए रसोई गैस की उपलब्धता को लेकर किसी बड़े संकट की आशंका नहीं दिखाई दे रही है।