अमेरिकी राहत के बाद भारत समेत एशियाई देशों की ओर बढ़ा ईरान, तेल बिक्री के लिए दिए नए प्रस्ताव
अमेरिका की ओर से तेल प्रतिबंधों में अस्थायी राहत मिलने के बाद ईरान ने भारत सहित एशिया के प्रमुख देशों के साथ फिर से ऊर्जा कारोबार बढ़ाने की कोशिशें तेज कर दी हैं। वर्षों से सीमित बाजार में कारोबार कर रहे तेहरान की नजर अब समुद्र में खड़े तेल भंडार को नए खरीदारों तक पहुंचाने पर है।
भारत समेत कई देशों से संपर्क में ईरान
रिपोर्टों के अनुसार, ईरान की राष्ट्रीय तेल कंपनी के प्रतिनिधियों ने भारत, जापान, दक्षिण कोरिया और अन्य देशों की रिफाइनरियों से संपर्क साधना शुरू कर दिया है। अमेरिका से मिली 60 दिनों की छूट के दौरान ईरान अपने निर्यात को गति देना चाहता है। माना जा रहा है कि इस कदम से लंबे समय से अटकी तेल खेपों को बाजार तक पहुंचाने में मदद मिलेगी। साथ ही ईरान अपने पारंपरिक ग्राहकों के अलावा नए साझेदारों की तलाश में भी जुटा हुआ है।
समुद्र में खड़े लाखों बैरल तेल के लिए खरीदारों की तलाश
विभिन्न विश्लेषण रिपोर्टों के मुताबिक जून के अंत तक करोड़ों बैरल कच्चा तेल और कंडेनसेट समुद्र में मौजूद था, जिनमें बड़ी मात्रा अभी किसी खरीदार के लिए निर्धारित नहीं है। प्रतिबंधों के कारण ईरान लंबे समय से मुख्य रूप से चीन को ही तेल बेच रहा था। अब वह अधिक देशों के साथ दीर्घकालिक समझौतों की संभावनाएं तलाश रहा है ताकि उत्पादन बढ़ाने के साथ निर्यात में भी तेजी लाई जा सके।
एशियाई देश अभी बरत रहे हैं सावधानी
हालांकि, कई एशियाई देश फिलहाल सतर्क रुख अपनाए हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी नीतियों में बदलाव की आशंका, भू-राजनीतिक तनाव और यूरोपीय प्रतिबंधों के कारण कंपनियां जल्दबाजी में फैसला नहीं लेना चाहतीं। जापान सहित कई देशों ने स्पष्ट किया है कि वे अपनी सरकारों की नीति के अनुरूप ही तेल खरीद संबंधी निर्णय लेंगे।
भारत के लिए क्यों अहम हो सकता है ईरानी तेल
भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात के जरिए पूरा करता है। एक समय ईरान भारत के प्रमुख आपूर्तिकर्ताओं में शामिल था, लेकिन प्रतिबंधों के बाद दोनों देशों के बीच तेल कारोबार लगभग बंद हो गया। अब यदि परिस्थितियां अनुकूल रहती हैं तो भारत के पास ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध हो सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि इससे दोनों देशों के आर्थिक संबंधों को भी नई मजबूती मिल सकती है।