चूरू साइबर ठगी: मदद के बहाने खाते से उड़ाए 1 लाख रुपये, पुलिस ने 85 हजार वापस दिलाए
राजस्थान के चूरू जिले के तारानगर में साइबर ठगी का मामला सामने आया है, जहां रिश्तेदार की तबीयत खराब होने का झांसा देकर एक व्यक्ति से 1 लाख रुपये ट्रांसफर करवा लिए गए। हालांकि समय पर शिकायत दर्ज होने के कारण पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 85 हजार रुपये होल्ड करवाकर पीड़ित के खाते में वापस दिला दिए। शेष राशि की रिकवरी की प्रक्रिया जारी है।
मदद के बहाने कॉल कर की गई ठगी
तारानगर निवासी जीतमल नाई को एक अज्ञात नंबर से फोन आया, जिसमें कॉल करने वाले ने खुद को परिचित बताते हुए कहा कि एक रिश्तेदार की तबीयत गंभीर है और तुरंत पैसों की जरूरत है। भावनात्मक रूप से प्रभावित कर आरोपी ने अलग-अलग खातों में पैसे भेजने के लिए दबाव बनाया। पीड़ित ने भरोसे में आकर कुल 1 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए। बाद में जब उन्होंने परिजनों से जानकारी ली, तो उन्हें ठगी का अहसास हुआ।
साइबर पोर्टल पर शिकायत के बाद शुरू हुई कार्रवाई
ठगी का पता चलने के बाद पीड़ित ने तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज करवाई। शिकायत मिलते ही पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और ट्रांजेक्शन की डिजिटल ट्रेल को ट्रैक किया। साइबर सेल की टीम ने उन बैंक खातों की पहचान की, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी।
85 हजार रुपये होल्ड कर लौटाए गए
पुलिस की त्वरित कार्रवाई के चलते ठगी गई राशि में से 85 हजार रुपये विभिन्न खातों में होल्ड करवा दिए गए। कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद न्यायालय के आदेश पर यह राशि पीड़ित के बैंक खाते में वापस कर दी गई। समय पर कार्रवाई के कारण बड़ी वित्तीय क्षति होने से बचाव हो सका। पीड़ित ने पुलिस और साइबर टीम की तत्परता की सराहना की है।
साइबर अपराध को लेकर पुलिस की अपील
पुलिस ने आमजन को साइबर ठगी के प्रति सतर्क रहने की सलाह दी है। अधिकारियों ने कहा कि किसी भी अनजान कॉल, मैसेज या लिंक पर भरोसा न करें और किसी भी स्थिति में बिना जांच-पड़ताल के पैसे ट्रांसफर न करें। साथ ही सोशल मीडिया और बैंक खातों में टू-स्टेप वेरिफिकेशन का उपयोग करने की भी अपील की गई है।
1930 हेल्पलाइन पर तुरंत शिकायत जरूरी
पुलिस ने बताया कि साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करना चाहिए। समय पर शिकायत मिलने पर ट्रांजेक्शन को ट्रैक कर राशि को होल्ड कराने और वापस दिलाने की संभावना काफी बढ़ जाती है। जागरूकता और सतर्कता ही साइबर अपराध से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय है।