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India Sugar Export: भारत के इस कदम से वैश्विक बाजार में हलचल, तीन साल तक चीनी निर्यात पर पड़ सकता है असर

कभी दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा चीनी निर्यातक रहा भारत आने वाले कुछ वर्षों तक वैश्विक बाजार में सीमित भूमिका निभा सकता है। गन्ने के उत्पादन पर मौसम संबंधी जोखिम और इथेनॉल की बढ़ती मांग के कारण देश में चीनी का अधिशेष घटने की आशंका है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में आपूर्ति और कीमतों पर इसका सीधा असर पड़ सकता है।

अल नीनो और इथेनॉल की मांग बनी बड़ी वजह

विशेषज्ञों के अनुसार, दो प्रमुख कारण भारत के चीनी निर्यात को प्रभावित कर रहे हैं। पहला, अल नीनो के कारण सामान्य से कम बारिश की आशंका, जिससे गन्ने की खेती प्रभावित हो सकती है। दूसरा, इथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने के अधिक इस्तेमाल से चीनी के लिए उपलब्ध कच्चे माल में कमी आ रही है।

इन दोनों कारणों से आने वाले वर्षों में लाखों टन चीनी वैश्विक बाजार तक नहीं पहुंच पाएगी।

वैश्विक बाजार में बढ़ सकती हैं कीमतें

भारत की हिस्सेदारी वैश्विक चीनी व्यापार में महत्वपूर्ण रही है। ऐसे में यदि भारत से निर्यात कम होता है तो एशिया, अफ्रीका और मध्य पूर्व के आयातक देशों के लिए आपूर्ति सीमित हो सकती है। इससे लंदन और न्यूयॉर्क जैसे प्रमुख कमोडिटी बाजारों में चीनी की कीमतों पर दबाव बढ़ने की संभावना है।

घरेलू मांग को प्राथमिकता दे सकती है सरकार

भारत दुनिया का सबसे बड़ा चीनी उपभोक्ता देश है। यहां चीनी केवल खाद्य उत्पाद नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में सरकार घरेलू उपलब्धता को प्राथमिकता दे सकती है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, चीनी मिलों को हर सीजन में निर्यात के लिए सरकारी मंजूरी की आवश्यकता होती है और फिलहाल सरकार घरेलू सप्लाई बनाए रखने पर अधिक जोर दे रही है।

ब्राजील और थाईलैंड पर भी मौसम का खतरा

भारत के अलावा दुनिया के अन्य बड़े चीनी निर्यातक देश भी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। ब्राजील में गन्ने का बड़ा हिस्सा इथेनॉल उत्पादन में इस्तेमाल हो रहा है, जबकि थाईलैंड में भी अल नीनो के कारण कम बारिश का खतरा मंडरा रहा है। ऐसे में वैश्विक स्तर पर चीनी की उपलब्धता और सीमित हो सकती है।

पिछले वर्षों में रहा भारत का दबदबा

भारत ने 2022-23 तक लगातार पांच सीजन में औसतन 68 लाख टन चीनी का निर्यात किया था, जो वैश्विक व्यापार का लगभग 10 प्रतिशत था। हालांकि मौजूदा सीजन में सीमित मात्रा में निर्यात के बाद सरकार ने 30 सितंबर तक शिपमेंट पर रोक लगा दी थी।

कमजोर मानसून से बढ़ी चिंता

मौसम विशेषज्ञों का अनुमान है कि अल नीनो के प्रभाव के कारण इस वर्ष मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। जून में कई क्षेत्रों में औसत से काफी कम बारिश दर्ज की गई, जिससे किसानों ने गन्ने की बुवाई में देरी की है। यदि यही स्थिति बनी रहती है तो आने वाले वर्षों में उत्पादन पर और दबाव बढ़ सकता है।

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