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होर्मुज खुलने के बाद क्या भारत के बासमती कारोबार को चुनौती देगा पाकिस्तान? निर्यातकों की बढ़ी चिंता

होर्मुज जलडमरूमध्य में शिपिंग गतिविधियां सामान्य होने की संभावना के बीच भारतीय बासमती चावल कारोबार से जुड़े निर्यातकों की चिंता बढ़ने लगी है। उन्हें आशंका है कि पाकिस्तान अपनी नई निर्यात प्रोत्साहन नीति और कम कीमतों के जरिए मध्य पूर्व के बाजारों में भारत को कड़ी टक्कर दे सकता है। हालांकि वैश्विक बासमती व्यापार में भारत का दबदबा कायम है, लेकिन पाकिस्तान की रणनीति प्रतिस्पर्धा को और तेज कर सकती है।

मध्य पूर्व में भारत और पाकिस्तान के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा

बासमती चावल के सबसे बड़े खरीदारों में सऊदी अरब, ईरान, इराक, संयुक्त अरब अमीरात, कुवैत, कतर और ओमान जैसे देश शामिल हैं। इन बाजारों में भारत और पाकिस्तान दोनों सक्रिय हैं। भारतीय ब्रांड जहां लंबे समय से अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए हुए हैं, वहीं पाकिस्तानी कंपनियां भी लगातार अपने निर्यात का दायरा बढ़ा रही हैं। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट खुलने के बाद आपूर्ति सामान्य होने से दोनों देशों के बीच प्रतिस्पर्धा और बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

भारतीय किस्मों की लोकप्रियता बनी बड़ी ताकत

दुनिया के कई सुपरमार्केट में भारतीय ब्रांडों के साथ-साथ पाकिस्तानी बासमती भी उपलब्ध है। भारत में विकसित 1121 बासमती किस्म ने वैश्विक बाजार में खास पहचान बनाई है और इससे भारतीय किसानों तथा निर्यातकों को बड़ा आर्थिक लाभ मिला है। विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता और ब्रांड वैल्यू के कारण भारतीय बासमती की मांग अभी भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन कीमतों की प्रतिस्पर्धा एक अहम चुनौती बन सकती है।

पाकिस्तान की ड्यूटी ड्रॉबैक योजना से बढ़ी चिंता

पाकिस्तान सरकार ने बासमती चावल निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ड्यूटी ड्रॉबैक स्कीम लागू की है। इसके तहत निर्यातकों को पहले चुकाए गए करों का एक हिस्सा वापस किया जाता है, जिससे वे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम कीमत पर उत्पाद बेच सकते हैं। भारतीय व्यापारियों को आशंका है कि इस नीति की वजह से पाकिस्तानी निर्यातक कीमतों में आक्रामक रणनीति अपनाकर बाजार हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश कर सकते हैं।

कीमतों पर पड़ सकता है असर

भारतीय निर्यातकों का मानना है कि यदि पाकिस्तान कम कीमतों पर बड़ी मात्रा में बासमती की आपूर्ति करता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों का नया मानक बन सकता है। ऐसी स्थिति में भारतीय कंपनियों के लिए ऊंचे दाम पर उत्पाद बेचना मुश्किल हो सकता है। खासतौर पर मध्य पूर्व के बाजारों में यह प्रतिस्पर्धा अधिक प्रभाव डाल सकती है, जहां दोनों देशों के उत्पाद सीधे एक-दूसरे के मुकाबले में हैं।

वैश्विक बाजार में अब भी भारत का दबदबा

चिंताओं के बावजूद बासमती चावल के वैश्विक व्यापार में भारत की स्थिति मजबूत बनी हुई है। दुनिया के कुल बासमती निर्यात का लगभग 70 से 80 प्रतिशत हिस्सा भारत से जाता है। भारतीय उत्पादों की गुणवत्ता, विविधता और लंबे समय से स्थापित ब्रांड पहचान उन्हें प्रतिस्पर्धा में बढ़त दिलाती है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि बदलते वैश्विक हालात में भारतीय निर्यातकों को कीमत और विपणन रणनीति पर भी ध्यान देना होगा।

होर्मुज स्ट्रेट का सामान्य होना व्यापार के लिए राहत

पिछले कुछ महीनों से क्षेत्रीय तनाव के कारण समुद्री व्यापार प्रभावित हुआ था। अब यदि होर्मुज जलडमरूमध्य से आवाजाही पूरी तरह सामान्य होती है, तो भारत और पाकिस्तान दोनों को अपने निर्यात बढ़ाने का अवसर मिलेगा। ऐसे में आने वाले महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि मध्य पूर्व के बाजारों में किस देश की रणनीति अधिक प्रभावी साबित होती है।

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