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यूरेनियम से लेकर सोने तक, मंगोलिया के खनिज भंडार भारत के लिए खोल सकते हैं नए अवसर

विदेश मंत्री एस. जयशंकर दो दिवसीय आधिकारिक दौरे पर मंगोलिया पहुंचे हैं, जहां भारत और मंगोलिया के बीच रणनीतिक साझेदारी को नई मजबूती देने पर जोर दिया जा रहा है। खनिज संसाधनों से समृद्ध मंगोलिया यूरेनियम, तांबा, सोना और रेयर अर्थ तत्वों के विशाल भंडार के कारण भारत के लिए ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण साझेदार बन सकता है।

मंगोलिया पहुंचे विदेश मंत्री एस. जयशंकर

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर अपनी दो दिवसीय यात्रा पर मंगोलिया की राजधानी उलानबटार पहुंचे, जहां उन्होंने अपनी मंगोलियाई समकक्ष बत्त्सेत्सेग बत्मंख से मुलाकात की। इस दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी, आर्थिक सहयोग और नए क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करने पर चर्चा हुई। भारत और मंगोलिया के बीच लंबे समय से मैत्रीपूर्ण संबंध रहे हैं और अब दोनों देश ऊर्जा, खनन तथा तकनीकी सहयोग को नई दिशा देने की कोशिश कर रहे हैं।

यूरेनियम के विशाल भंडार पर भारत की नजर

मंगोलिया दुनिया के खनिज संपदा से समृद्ध देशों में गिना जाता है। देश में यूरेनियम के बड़े भंडार मौजूद हैं, जिन्हें भविष्य की ऊर्जा जरूरतों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। भारत अपने नागरिक परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम के लिए यूरेनियम आयात के स्रोतों में विविधता लाने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में मंगोलिया के साथ संभावित सहयोग भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने में मददगार साबित हो सकता है। दोनों देशों के बीच इस क्षेत्र में दीर्घकालिक साझेदारी की संभावनाओं पर चर्चा जारी है।

तांबा और सोना भी बढ़ा रहे हैं रणनीतिक महत्व

मंगोलिया के पास तांबा और सोने के बड़े भंडार भी हैं। दक्षिण गोबी क्षेत्र की ओयु टोलगोई खदान दुनिया के प्रमुख तांबा और सोना उत्पादक क्षेत्रों में गिनी जाती है। आधुनिक उद्योगों, इलेक्ट्रिक वाहनों और बुनियादी ढांचे के विकास में तांबे की मांग लगातार बढ़ रही है। वहीं सोने के भंडार आर्थिक दृष्टि से मंगोलिया को महत्वपूर्ण बनाते हैं। यही कारण है कि कई देश मंगोलिया के खनिज संसाधनों में निवेश की संभावनाएं तलाश रहे हैं।

रेयर अर्थ और महत्वपूर्ण खनिजों का भी बड़ा केंद्र

यूरेनियम और तांबे के अलावा मंगोलिया के पास रेयर अर्थ तत्वों, लिथियम, फ्लोर्सपार, जिंक और लौह अयस्क जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के भी बड़े भंडार हैं। ये संसाधन भविष्य की हरित ऊर्जा तकनीकों, इलेक्ट्रॉनिक्स और रक्षा उद्योग के लिए अहम माने जाते हैं। वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण खनिजों की बढ़ती मांग के बीच मंगोलिया की रणनीतिक अहमियत लगातार बढ़ रही है।

भारत-मंगोलिया संबंधों को मिल सकती है नई दिशा

भारत और मंगोलिया के बीच खनन, ऊर्जा और आर्थिक सहयोग को लेकर पहले से बातचीत जारी है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देश दीर्घकालिक समझौतों तक पहुंचते हैं, तो इससे भारत की ऊर्जा सुरक्षा और औद्योगिक विकास को लाभ मिल सकता है। हालांकि किसी भी संभावित परियोजना का वास्तविक असर भविष्य में होने वाले समझौतों और निवेश पर निर्भर करेगा। ऐसे में जयशंकर की मौजूदा यात्रा को दोनों देशों के संबंधों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

दक्षिण कोरिया भी जाएंगे जयशंकर

मंगोलिया दौरे के बाद विदेश मंत्री एस. जयशंकर दक्षिण कोरिया की यात्रा पर रवाना होंगे। सियोल में वह अपने दक्षिण कोरियाई समकक्ष के साथ द्विपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे और जेजू फोरम में भी भाग लेंगे। इस दौरे का उद्देश्य एशिया क्षेत्र में भारत की कूटनीतिक और आर्थिक भागीदारी को और मजबूत करना है।

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