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इंसुलिन की कमी से बढ़ सकता है Diabetic Ketoacidosis का खतरा, जानिए कब जरूरी है तुरंत इलाज

डायबिटीज के मरीजों के लिए इंसुलिन की कमी गंभीर स्वास्थ्य संकट पैदा कर सकती है। ऐसी स्थिति में Diabetic Ketoacidosis (DKA) नामक खतरनाक जटिलता विकसित हो सकती है, जो समय पर इलाज न मिलने पर जानलेवा भी साबित हो सकती है। CDC और मेयो क्लिनिक के अनुसार इसके शुरुआती लक्षणों को पहचानना और सही समय पर डॉक्टर से संपर्क करना बेहद जरूरी है।

क्या है डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA)?

डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (DKA) एक गंभीर स्थिति है, जो तब पैदा होती है जब शरीर में इंसुलिन की मात्रा बहुत कम हो जाती है। इंसुलिन की कमी के कारण शरीर ग्लूकोज का सही तरीके से उपयोग नहीं कर पाता और ऊर्जा प्राप्त करने के लिए तेजी से फैट को तोड़ना शुरू कर देता है। इस प्रक्रिया में लिवर कीटोन्स नामक अम्लीय तत्व बनाता है। जब खून में कीटोन्स का स्तर बहुत अधिक बढ़ जाता है, तो रक्त का संतुलन बिगड़ने लगता है और DKA की स्थिति पैदा हो सकती है। यह समस्या विशेष रूप से टाइप-1 डायबिटीज के मरीजों में अधिक देखी जाती है, लेकिन अन्य मरीज भी इससे प्रभावित हो सकते हैं।

शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

CDC के मुताबिक DKA के कुछ शुरुआती संकेत समय रहते पहचान लिए जाएं तो स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है। मरीज को अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, मुंह और त्वचा का सूख जाना तथा ब्लड शुगर का असामान्य रूप से बढ़ जाना इसके सामान्य लक्षण हैं। कई मामलों में पेशाब की जांच में कीटोन्स की मात्रा भी अधिक पाई जाती है। यदि ब्लड शुगर लगातार 240 mg/dL से ऊपर बनी रहती है, तो अतिरिक्त सतर्कता बरतने की जरूरत होती है।

इन गंभीर संकेतों पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें

विशेषज्ञों के अनुसार DKA के बढ़ने पर मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। सांसों से फलों जैसी गंध आना, सांस लेने में परेशानी होना, लगातार उल्टी होना या पेट में तेज दर्द और मरोड़ उठना गंभीर संकेत माने जाते हैं। इसके अलावा अत्यधिक कमजोरी, भ्रम की स्थिति या मानसिक उलझन भी इमरजेंसी की ओर इशारा कर सकती है। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर बिना देरी किए मरीज को तुरंत अस्पताल पहुंचाना चाहिए, क्योंकि समय पर इलाज मिलने से जटिलताओं का जोखिम कम किया जा सकता है।

कैसे करें इस खतरनाक स्थिति से बचाव?

डायबिटीज के मरीज नियमित रूप से अपनी दवाएं और इंसुलिन निर्धारित समय पर लेते रहें। ब्लड शुगर की नियमित जांच करना और जरूरत पड़ने पर कीटोन टेस्ट कराना भी महत्वपूर्ण माना जाता है। पर्याप्त मात्रा में पानी पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन की समस्या नहीं होती, जिससे DKA का खतरा कम किया जा सकता है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बीमारी, संक्रमण या असामान्य शुगर लेवल की स्थिति में डॉक्टर के निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है।

समय पर पहचान से बच सकती है जान

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि Diabetic Ketoacidosis एक मेडिकल इमरजेंसी है, लेकिन इसके लक्षणों की समय रहते पहचान और उचित उपचार से गंभीर परिणामों से बचा जा सकता है। इसलिए डायबिटीज से पीड़ित लोगों और उनके परिवार के सदस्यों को इसके संकेतों और बचाव के तरीकों की जानकारी होना बेहद आवश्यक है।

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