भारत के कृषि निर्यात पर दोहरा झटका, चीन के बाद जापान ने भी बढ़ाई मुश्किलें
भारत का कृषि निर्यात लगातार बढ़ रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय बाजार में गुणवत्ता मानकों को लेकर उठ रहे सवाल नई चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं। एक तरफ चीन ने भारतीय मिर्च की खेप पर रोक लगा दी है, तो दूसरी ओर जापान ने आम के निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया है। इससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा के साथ-साथ गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों को लेकर भारत को अपनी व्यवस्था और मजबूत करनी होगी।
चीन ने भारतीय मिर्च की खेप क्यों रोकी?
भारतीय मिर्च निर्यातकों को तब बड़ा झटका लगा जब चीन ने कुछ खेपों को कथित तौर पर अत्यधिक कीटनाशक अवशेष पाए जाने के कारण रोक दिया। इससे पहले गैर-बासमती चावल की कई खेपों पर भी आपत्ति जताई जा चुकी है। इस घटनाक्रम ने निर्यातकों और किसानों की चिंता बढ़ा दी है। आंध्र प्रदेश के मिर्च उत्पादकों और व्यापारियों ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग करते हुए गुणवत्ता जांच को और सख्त बनाने तथा किसानों को सुरक्षित खेती के तरीकों के प्रति जागरूक करने की अपील की है।
जापान ने आम के निर्यात पर लगाया प्रतिबंध
भारत के लिए चिंता की दूसरी वजह जापान का फैसला बना। जापानी निरीक्षण टीम को भारतीय प्लांटों में फ्यूमिगेशन और गुणवत्ता नियंत्रण प्रक्रिया में कुछ खामियां मिलीं, जिसके बाद आम के आयात पर रोक लगा दी गई। यह पहली बार नहीं है जब जापान ने ऐसा कदम उठाया है। इससे पहले 1986 में भी फल मक्खी के संक्रमण की आशंका के कारण भारतीय आमों पर प्रतिबंध लगाया गया था, जिसे लगभग दो दशक बाद हटाया गया था। अब एक बार फिर निर्यातकों के सामने चुनौती खड़ी हो गई है।
मसालों को लेकर भी बढ़ी वैश्विक सख्ती
भारतीय मसालों पर भी पिछले कुछ समय में कई देशों ने सवाल उठाए हैं। हांगकांग और सिंगापुर ने कुछ उत्पादों में एथिलीन ऑक्साइड की मौजूदगी को लेकर जांच शुरू की थी। इसके बाद कई अन्य देशों ने भी भारतीय मसालों की गुणवत्ता की समीक्षा शुरू कर दी। बढ़ती निगरानी के कारण कई निर्यातकों को अतिरिक्त परीक्षण और दस्तावेजी प्रक्रिया से गुजरना पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि गुणवत्ता नियंत्रण में लापरवाही से भारतीय उत्पादों की वैश्विक छवि प्रभावित हो सकती है।
घरेलू जांच व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
विशेषज्ञों का कहना है कि भारत में खाद्य सुरक्षा के लिए नियम तो मौजूद हैं, लेकिन कई सरकारी प्रयोगशालाओं में आधुनिक परीक्षण उपकरणों की कमी है। कई मामलों में सैंपल की जांच के लिए निजी लैब का सहारा लेना पड़ता है, जिससे प्रक्रिया लंबी हो जाती है। रिपोर्टों के अनुसार, खाद्य पदार्थों में कीटनाशक अवशेषों की निगरानी और परीक्षण व्यवस्था को और मजबूत करने की जरूरत है, ताकि अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप गुणवत्ता सुनिश्चित की जा सके।
किसानों और निर्यातकों की बढ़ी चिंता
कृषि उत्पादों पर लगातार लग रही पाबंदियों ने किसानों और निर्यातकों की चिंता बढ़ा दी है। उनका कहना है कि यदि समय रहते गुणवत्ता सुधार, आधुनिक परीक्षण सुविधाएं और जागरूकता अभियान नहीं चलाए गए, तो वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी प्रभावित हो सकती है। कई उद्योग संगठनों ने केंद्र और राज्य सरकारों से इस दिशा में ठोस कदम उठाने की मांग की है।
वैश्विक कृषि व्यापार में भारत की चुनौती
खेती योग्य भूमि के मामले में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल होने के बावजूद वैश्विक कृषि व्यापार में भारत की हिस्सेदारी अभी भी 3 प्रतिशत से कम है। हालांकि हाल के वर्षों में कृषि निर्यात का आंकड़ा लगातार बढ़ा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि सिर्फ उत्पादन बढ़ाने से काम नहीं चलेगा। अंतरराष्ट्रीय बाजार में टिके रहने के लिए गुणवत्ता, ट्रेसबिलिटी और खाद्य सुरक्षा मानकों को सर्वोच्च प्राथमिकता देनी होगी।