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राष्ट्रीय ऊंट दिवस पर अलवर में निकली रैली, राईका समाज ने उठाई ऊंट संरक्षण और छात्रावास भूमि की मांग

अलवर में राष्ट्रीय ऊंट दिवस के अवसर पर श्री वीर हड़मल जी राईका सेवा समिति के तत्वावधान में भव्य रैली का आयोजन किया गया। रैली में बड़ी संख्या में रैबारी, राईका और देवासी समाज के लोग पारंपरिक वेशभूषा में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान समाज के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का सम्मान भी किया गया। वहीं समाज के प्रतिनिधियों ने राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को ज्ञापन सौंपकर ऊंट संरक्षण और समाज के शैक्षणिक विकास से जुड़ी विभिन्न मांगें रखीं।

मोती डूंगरी से शुरू होकर शहरभर में निकली रैली

राष्ट्रीय ऊंट दिवस के अवसर पर आयोजित यह रैली मोती डूंगरी के समीप से शुरू हुई। रैली शहर के प्रमुख बाजारों और विभिन्न इलाकों से गुजरते हुए पुनः मोती डूंगरी पहुंचकर संपन्न हुई। रैली में शामिल लोगों ने ऊंट संरक्षण, पशुपालक समाज के अधिकारों और पारंपरिक संस्कृति के संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में समाज के वरिष्ठजन, युवा और महिलाएं बड़ी संख्या में मौजूद रहे।

प्रतिभावान छात्र-छात्राओं का हुआ सम्मान

रैली के समापन के बाद राईका गौरव दिवस के तहत समाज के प्रतिभावान छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया गया। वक्ताओं ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में समाज को आगे बढ़ाने की आवश्यकता है और युवाओं को उच्च शिक्षा तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की ओर प्रेरित किया जाना चाहिए। इस अवसर पर समाज के विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धि हासिल करने वाले लोगों का भी अभिनंदन किया गया।

नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली को सौंपा ज्ञापन

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली रहे। समाज के प्रतिनिधियों ने उन्हें ज्ञापन सौंपते हुए ऊंट पालकों की समस्याओं और समाज के विकास से जुड़े मुद्दों पर ध्यान दिलाया। ज्ञापन में कहा गया कि ऊंट राजस्थान का गौरव और राज्य पशु है, जिसकी परंपरागत देखभाल और संरक्षण का कार्य सदियों से रैबारी, राईका और देवासी समाज करता आ रहा है।

ऊंटों को बफर जोन और आरक्षित वन में चराने की मांग

ज्ञापन में मांग की गई कि ऊंटों के लिए जंगल, बफर जोन और आरक्षित वन क्षेत्रों में चराई की विशेष अनुमति दी जाए। समाज का कहना है कि चारागाह, गोचर और ओरण भूमि लगातार कम होने से पारंपरिक ऊंट पालकों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। बदलते नियमों और चराई स्थलों की कमी के कारण ऊंट पालन प्रभावित हो रहा है, जिससे समाज की आर्थिक स्थिति पर भी असर पड़ रहा है।

छात्रावास के लिए भूमि आवंटन की मांग

समाज ने ज्ञापन में यह भी मांग की कि रैबारी, राईका और देवासी समाज के विद्यार्थियों के लिए छात्रावास निर्माण हेतु निःशुल्क या रियायती दर पर भूमि उपलब्ध कराई जाए। समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि छात्रावास भूमि आवंटन से संबंधित फाइल नगर विकास न्यास में प्रक्रियाधीन है। उन्होंने सरकार से इस प्रक्रिया को शीघ्र पूरा कर समाज के विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की।

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