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भारत से रिश्ते सुधारने की पैरवी, पाकिस्तान में उठी नई मांग

ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े तनाव के बीच पाकिस्तान में फिर से संवाद बहाली की मांग तेज हो रही है। पाकिस्तानी मीडिया और रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस्लामाबाद को भारत और अफगानिस्तान के साथ बातचीत का रास्ता खोलने की पहल करनी चाहिए, ताकि क्षेत्रीय स्थिरता और आर्थिक हितों को मजबूती मिल सके।

पड़ोसी देशों से संवाद बढ़ाने की सलाह

भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के महीनों में बढ़े तनाव के बावजूद पाकिस्तान के भीतर कई वर्गों की ओर से बातचीत बहाल करने की वकालत की जा रही है। पाकिस्तानी अखबार ‘डॉन’ ने अपने संपादकीय में सुझाव दिया है कि शहबाज शरीफ सरकार को भारत और अफगानिस्तान के साथ संबंध सुधारने की दिशा में सक्रिय पहल करनी चाहिए। अखबार का कहना है कि क्षेत्रीय शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए पड़ोसी देशों के साथ संवाद बनाए रखना जरूरी है। साथ ही लंबित विवादों के समाधान के लिए कूटनीतिक रास्ते अपनाने पर जोर दिया गया है।

मध्यस्थता की भूमिका का हवाला देकर बढ़ी उम्मीदें

पाकिस्तानी मीडिया ने हाल की अंतरराष्ट्रीय घटनाओं में पाकिस्तान की कथित मध्यस्थ भूमिका का उल्लेख करते हुए इसे देश की कूटनीतिक क्षमता का उदाहरण बताया है। संपादकीय में अतीत की उन घटनाओं का भी जिक्र किया गया, जब पाकिस्तान ने वैश्विक स्तर पर संवाद स्थापित कराने में भूमिका निभाई थी। विश्लेषकों का मानना है कि इसी अनुभव का उपयोग दक्षिण एशिया में तनाव कम करने और पड़ोसी देशों के साथ विश्वास बहाली के लिए किया जा सकता है।

भारत और अफगानिस्तान को बातचीत का प्रस्ताव देने की वकालत

डॉन ने अपने लेख में कहा है कि पाकिस्तान को अपने राष्ट्रीय हितों से समझौता किए बिना भारत और अफगानिस्तान की ओर मित्रता का हाथ बढ़ाना चाहिए। अखबार के अनुसार, यदि इस्लामाबाद औपचारिक रूप से वार्ता का प्रस्ताव देता है और दूसरी ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया नहीं मिलती, तो क्षेत्रीय शांति के प्रति विभिन्न देशों के रुख को लेकर स्पष्ट संदेश जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि संवाद ही विवादों को सुलझाने का सबसे प्रभावी माध्यम है।

ट्रैक-2 वार्ताओं के जरिए तनाव कम करने की कोशिश

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, भारत और पाकिस्तान के बीच हाल के समय में ट्रैक-2 स्तर पर कई दौर की अनौपचारिक बातचीत हो चुकी है। इन बैठकों का मुख्य उद्देश्य दोनों देशों के बीच तनाव कम करना और संवाद के रास्ते खुले रखना रहा है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि भविष्य में भी ऐसे कुछ और दौर आयोजित किए जा सकते हैं। हालांकि इन बैठकों में विवादित मुद्दों के समाधान के बजाय भरोसे का माहौल बनाने पर अधिक ध्यान दिया गया।

सिंधु जल संधि समेत कई मुद्दों पर कायम है तनाव

भारत और पाकिस्तान के बीच इस समय सिंधु जल संधि सहित कई विषयों को लेकर मतभेद बने हुए हैं। दोनों देशों के राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी बयान भी समय-समय पर तनाव को बढ़ाते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे माहौल में किसी भी तरह की औपचारिक वार्ता से पहले विश्वास बहाली के कदम और शांतिपूर्ण संवाद की निरंतरता बेहद महत्वपूर्ण होगी। दक्षिण एशिया में स्थिरता के लिए दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संपर्क बनाए रखना आवश्यक माना जा रहा है।

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