टीकाराम जूली का सरकार पर बड़ा हमला, शिक्षा व्यवस्था को बताया ‘अविश्वसनीय’
राजस्थान विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने केंद्र और राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। अलवर में आयोजित प्रेस वार्ता में उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकारों की नीतियों के कारण शिक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर गहरा संकट पैदा हो गया है। उन्होंने पेपर लीक, बेरोजगारी, महंगाई और कानून व्यवस्था को लेकर भी सरकार को कठघरे में खड़ा किया।
शिक्षा और परीक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल
टीकाराम जूली ने कहा कि देश की परीक्षा प्रणाली पर छात्रों का भरोसा लगातार कम होता जा रहा है। उन्होंने NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सामने आ रहे पेपर लीक मामलों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उन्होंने NTA की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफे की मांग की। जूली के अनुसार परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता की कमी ने पूरे सिस्टम को अविश्वसनीय बना दिया है।
निजीकरण और फीस वृद्धि से बढ़ा आर्थिक बोझ
नेता प्रतिपक्ष ने शिक्षा के बढ़ते निजीकरण पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षकों की भारी कमी है, जबकि निजी संस्थानों की फीस लगातार बढ़ रही है। इससे मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। जूली ने आरोप लगाया कि छात्रों को महंगी कोचिंग और निजी संस्थानों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जबकि सरकार शिक्षा के स्तर को सुधारने में विफल दिख रही है।
बेरोजगारी और भर्ती प्रक्रियाओं पर निशाना
टीकाराम जूली ने देश में बढ़ती बेरोजगारी को गंभीर मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि पढ़े-लिखे युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है और भर्ती परीक्षाओं में लगातार देरी व अनियमितताएं हो रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार रोजगार सृजन के बजाय केवल आंकड़ों के माध्यम से स्थिति को बेहतर दिखाने का प्रयास कर रही है। उनके अनुसार यह स्थिति युवाओं के भविष्य के साथ सीधा खिलवाड़ है।
राजस्थान सरकार पर ‘तबेला’ वाला तंज
राज्य सरकार पर तीखा हमला करते हुए जूली ने कहा कि राजस्थान में प्रशासनिक अनुशासन पूरी तरह खत्म हो गया है। उन्होंने तंज कसते हुए सरकार को “तबेला” करार दिया और कहा कि जब मंत्री खुद एसीबी कार्यालय जाकर अपनी ही एजेंसियों पर सवाल उठाएं तो सरकार की विश्वसनीयता पर प्रश्न उठना स्वाभाविक है। उन्होंने नकली खाद-बीज और भ्रष्टाचार मामलों में कार्रवाई की धीमी गति पर भी सवाल उठाए।
जिले के नामकरण और प्रशासनिक फैसलों पर सवाल
खैरथल-तिजारा जिले के नाम परिवर्तन को लेकर भी टीकाराम जूली ने सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह के निर्णय राजनीतिक दबाव में लिए जा रहे हैं और जनता की राय को नजरअंदाज किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासनिक फैसलों में पारदर्शिता की कमी चिंता का विषय है और इससे जनता में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है।
स्थानीय मुद्दों और बुनियादी सुविधाओं पर नाराजगी
जूली ने अलवर शहर की बुनियादी समस्याओं जैसे सीवरेज, सड़कें, बिजली कटौती और जलभराव को लेकर भी सरकार पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि मानसून से पहले नालों की सफाई न होना प्रशासन की बड़ी लापरवाही है। नगर निगम और अन्य विभागों की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि जनता रोजमर्रा की समस्याओं से जूझ रही है, लेकिन समाधान के प्रयास नाकाफी हैं।
निष्कर्ष
टीकाराम जूली के इस बयान ने एक बार फिर राजस्थान की राजनीति को गरमा दिया है। उन्होंने शिक्षा व्यवस्था से लेकर प्रशासनिक ढांचे तक सरकार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अब देखना होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और आने वाले दिनों में यह राजनीतिक विवाद किस दिशा में जाता है।